अंतरधार्मिक विवाह का मामला:कलेक्टर की बजाए निगमकर्मी ने बना दिया अंतरधार्मिक विवाह करने वाले युवक-युवती का मैरिज सर्टिफिकेट

नगर निगम के एक बाबू ने हाथोंहाथ अंतरधार्मिक विवाह का सर्टिफिकेट बना दिया। सुबह आवेदन किया और दोपहर में सर्टिफिकेट तैयार हो गया। आम तौर पर निगम मैरिज सर्टिफिकेट बनाने के लिए एक हफ्ते का समय लेता है। कायदे से अंतरधार्मिक विवाह होने पर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसका अधिकार कलेक्टर के पास है। दरअसल, दो महीने पहले दो अलग-अलग धर्मों के युवक-युवती ने शादी कर ली। युवती के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई तो युवक-युवती ने शादी का सर्टिफिकेट दिखा दिया। सर्टिफिकेट उसी दिन कैसे बना। इसकी जांच शुरू हुई। जांच में पता निगम के एक कार्मिक चंचल चांवरिया की भूमिका संदिग्ध पाई गई। उसी कार्मिक ने मिलीभगत कर उसी दिन सर्टिफिकेट तैयार कर दिया। जबकि अलग-अलग धर्म के युवक-युवती होने पर ये सर्टिफिकेट स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत बनेगा और वो अधिकार कलेक्टर के पास ही है। जांच के दौरान नगर निगम के उपायुक्त कुलराज मीणा को पता चला कि इस शादी के ठीक एक सप्ताह पहले ऐसा ही एक और सर्टिफिकेट जारी हुआ। उसमें भी अलग-अलग धर्म के युवक-युवती थे। ऐसे में जांच कमेटी ने दोनों ही सर्टिफिकेट खुद ही निरस्त करते हुए सांख्यिकी विभाग को डेटा से हटाने के लिए कह दिया। सर्टिफिकेट बनाने में भूमिका संदिग्ध पाए जाने वाले चंचल चांवरिया के खिलाफ पहले 17 सीसी की चार्जशीट और बाद में 16 सीसी में परिवर्तित कर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जांच शुरू होने से पहले ही चांवरिया को सर्टिफिकेट बनाने वाले स्थान से हटा दिया गया था। समझें 1954 में बने स्पेशल मैरिज एक्ट के बारे में दो अलग-अलग धर्म के लोग शादी कर सकें इसके लिए 1954 में स्पेशल मैरिज एक्ट बना था। हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार सप्तपदी से शादी होती है। मुस्लिम शरीयत कानून के अनुसार निकाह होता है। पारसी और क्रिश्चियन कानूनों से भी शादी होती है। स्पेशल मैरिज एक्ट में अलग धर्मों के दो बालिग युवक-युवती शादी कर सकते हैं। इस एक्ट के तहत शादी करने के बाद भी किसी को धर्म बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए युवक-युवती का बालिग होना जरूरी है। इस एक्ट के तहत की गई शादी का सर्टिफिकेट बनाने का हक कलेक्टर को होता है। कलेक्टर को इसलिए क्योंकि उनके पास मजिस्ट्रेट की पावर होती है। इस कानून की धारा 5, 6 और 7 के तहत शादी करने से एक महीने पहले मैरेज रजिस्ट्रार को बताना होगा कि वो शादी करने वाले हैं। उसके बाद रजिस्ट्रार दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर उन दोनों की सहमति जानेगा। अगर एक पक्ष ने भी शादी से इनकार किया तो रजिस्ट्रार उसे सर्टिफिकेट देने से इनकार कर सकता है। अगर आपत्ति नहीं हुई तो गवाह आदि की प्रक्रिया पूरी कर शादी होगी और सर्टिफिकेट भी बनेगा।

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