आरएसएस के पथ संचलन का फूलों से हुआ स्वागत:बड़वानी में बौद्धिक प्रमुख बोले- शास्त्र के साथ शस्त्र भी है जरूरी

बड़वानी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने विजयादशमी पर्व और अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शनिवार सुबह शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। इसके बाद शहर में एक विशाल पथ संचलन निकाला गया, जिसका प्रमुख मार्गों पर लोगों ने फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवक बैंड की धुन पर अनुशासित ढंग से कदमताल करते हुए चल रहे थे। यह पथ संचलन शहर के शहीद भीमानायक पीजी कॉलेज मैदान से शुरू होकर मोटी माता चौक, रामदेव मंदिर रोड, पालाबाजार, कालका माता मंदिर, कारगिल चौक, सतीमाता मंदिर (चंचल चौराहा), गायत्री मंदिर सिर्वी मोहल्ला, योगमाया माता मंदिर, भवानी माता मंदिर, पुराना कलेक्ट्रेट, रणजीत चौक, एमजी रोड, मोटीमाता चौक से होते हुए वापस शहीद भीमानायक पीजी कॉलेज मैदान पर समाप्त हुआ। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। संचलन से पूर्व, प्रांत सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख आशीष जी जाधम ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा और संस्कृति के लिए शास्त्र के साथ शस्त्र की भी आवश्यकता है। भारत ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया, लेकिन जब भी देश पर हमला हुआ है, तो उसने मुंहतोड़ जवाब दिया है। जाधम ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के बाद से लगातार सेवा कार्यों में संलग्न है और हिंदू समाज में आत्मविश्वास व स्वाभिमान बढ़ाने के लिए हर क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज समाज आशा भरी नजरों से संघ की ओर देख रहा है। उन्होंने 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन संगठन की नींव रखे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वट वृक्ष की तरह पूरे विश्व में अपनी अनोखी छवि दर्शा रहा है, जिसके कारण पूरी दुनिया भारत की ओर अग्रसर है। उन्होंने संघ के पूर्वजों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के जीवन समर्पण को भी याद किया।

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