छत्तीसगढ़ में 6,000 पदों पर चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगा है। इसे लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट के जस्टिस पीपी साहू ने नए नियुक्ति पत्र जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई तक पुलिस विभाग किसी भी उम्मीदवार को जॉइनिंग लेटर नहीं दे सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी। पुलिस विभाग में प्रदेश के सभी जिलों में आरक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए लिखित और शारीरिक परीक्षा ली गई थी। चयन सूची जारी होने के बाद भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगा है। इसे लेकर सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली के अभ्यर्थी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान सहित अन्य ने मिलकर अलग-अलग याचिकाएं दायर की है। आउटसोर्स एजेंसी पर गंभीर अनियमितता का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट को बेहद भ्रष्ट तरीकों से संपन्न कराया गया। फिजिकल टेस्ट में डेटा रिकॉर्डिंग का काम शासन द्वारा आउटसोर्स पर नियुक्त टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था, जिसने निष्पक्षता का पालन नहीं किया और कथित रूप से कई अभ्यर्थियों को पैसों के लेन-देन के जरिए अनुचित लाभ पहुंचाया। बिलासपुर एसएसपी के पत्र को बनाया आधार याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण बिलासपुर एसएसपी और चयन समिति के अध्यक्ष द्वारा 19 दिसंबर 2024 को पुलिस मुख्यालय रायपुर को लिखा गया पत्र है, जिसमें उन्होंने फिजिकल टेस्ट के दौरान पाई गई गड़बड़ियों की आधिकारिक जानकारी दी थी। यह भी बताया कि भर्ती पूरे प्रदेश के लिए एक ही सेंट्रलाइज्ड विज्ञापन के माध्यम से की जा रही है। चूंकि सभी जिलों में फिजिकल टेस्ट कराने वाली आउटसोर्स कंपनी एक ही है, इसलिए बिलासपुर की तरह राज्य के अन्य केंद्रों पर भी धांधली होने की पूरी आशंका है। 129 अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ, सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि शासन द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट में बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक ने यह स्वीकार किया है कि फिजिकल टेस्ट के दौरान गंभीर गड़बड़ियां हुईं और गलत डेटा दर्ज किया गया। इतना ही नहीं, टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फिजिकल टेस्ट से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कर दिए गए। जांच में कुल 129 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें अनुचित लाभ देते हुए अधिक अंक प्रदान किए गए। इसके चलते मेरिट में आने वाले योग्य अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सका। पुलिस भर्ती नियम 2007 का उल्लंघन बताया याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर नई प्रक्रिया कराई जानी चाहिए। ऐसे में चयन प्रक्रिया का समापन, अंतिम सूची जारी करना और नियुक्ति आदेश प्रकाशित करना नियमों के खिलाफ और गैरकानूनी है। 2500 लोगों को मिल चुके नियुक्ति पत्र हाईकोर्ट को बताया गया कि कुल 6000 पदों में से अब तक लगभग 2500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र बांटे जा चुके हैं। ऐसे में यदि नियुक्तियां नहीं रोकी गईं, तो जांच प्रभावित हो सकती है। हालांकि, शासन की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि शिकायत केवल एक सेंटर तक सीमित है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अंतिम फैसला आने या अगली सुनवाई तक विभाग कोई भी नया नियुक्ति आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। सरकार को जवाब देने लिए दो सप्ताह का समय दिया है।


