‘मेरा बच्चा मास्टर माइंड स्कूल के केजी सेकंड में पढ़ता है। आरटीई के तहत एडमिशन हुआ था, फीस नहीं लग रही थी। अब यह स्कूल बंद हो रहा है। संचालक दूसरा स्कूल शुरू कर रहे हैं। आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कह दिया, हमारे स्कूल में पढ़ाना हो तो फीस लगेगी। ऐसे में मेरे बच्चे के सामने पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया है। फीस 40 से 50 हजार है। मैं छोटा– मोटा काम करता हूं। इतनी फीस कैसे जमा कराऊं। ‘ यह पीड़ा बिचौली मर्दाना में रहने वाले जितेंद्र चौहान की है, जिनके बच्चे जयश चौहान का पिछले साल आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत मास्टर माइंड स्कूल में एडमिशन हुआ था। जितेंद्र खुश थे, क्योंकि निजी स्कूल की फीस का खर्च अब उनके ऊपर बोझ नहीं रहेगा। आरटीई में 25 फीसदी प्रवेश का खर्चा सरकार उठाती है, लेकिन जितेंद्र चौहान की मुश्किलें अब बढ़ने जा रही है। जिस स्कूल में उनके बेटे का एडमिशन हुआ था, वह बंद होने जा रहा है। ऐसे में जितेंद्र चौहान के बेटे सहित 42 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें आरटीई के तहत अब लाभ नहीं मिलेगा। अब कभी स्कूल जाते हैं तो उन्हें फीस देना पड़ेगी। जितेंद्र बताते हैं कि मास्टर माइंड स्कूल में 42 बच्चे हैं, जिन्हें अगले सत्र से आरटीई के तहत प्रवेश देने का नोटिस दिया है। कारण बताया कि स्कूल अभी तक मप्र बोर्ड से मान्यता प्राप्त था। अब उसे सीबीएसई किया जा रहा है और अन्य जगह स्कूल का संचालन किया जाएगा। आरटीई के तहत बच्चों को फीस में राहत नहीं मिल पाएगी। इस समस्या से परेशान ऐसे ही 25 से अधिक अभिभावक अपने बच्चों के साथ पहुंचे और अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए आवेदन सौंपा। अधिकारियों का भी मानना है कि स्कूल संचालक को ऐसा निर्णय लेने से पहले सभी अभिभावकों को बताना चाहिए था और उनके लिए प्रबंध करना चाहिए थे, जो नहीं किए गए। मामले की शिकायत लेकर अभिभावक कलेक्ट्रेट परिसर भी पहुंचे और शिकायत की। तीन कैंपस फिर भी दूसरे स्कूल में एडमिशन नहीं
अभिभावक नितेश परमार ने बताया कि मेरे बच्चे का नर्सरी में एडमिशन कराया था। मास्टर माइंड स्कूल के तीन कैंपस हैं। हमारे बच्चे वाले स्कूल को बंद कर दिया है और बच्चों को दूसरे कैंपस में एडमिशन के लिए बोला है, लेकिन हमारा बच्चे का तो आरटीई के तहत एडमिशन हुआ था। अब दूसरे कैंपस में एडमिशन कराते हैं तो उसका एडमिशन आरटीई में नहीं होगा।
अगल से फीस देना पड़ेगी। ऐसे में हम फीस की व्यवस्था कहां से करें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवेदन देकर कहा है कि हमारे बच्चों का आरटीई में ही अन्य कैंपस में एडमिशन कराएं। हमने मांग की है कि समस्या का समाधान निकाला जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई खराब ना हो। विधिवत स्कूल को बंद किया है: स्कूल संचालक
मास्टर माइंड स्कूल के संचालक नवीन चौधरी ने बताया कि नया स्कूल दूधिया गांव में खोला है। जो सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है। पुराना स्कूल कॉलोनी में था, जिसकी विधिवत प्रक्रिया पूरी कर बंद करने का निर्णय लिया है। मैं भी चाहता हूं बच्चों का भविष्य खराब ना हो। मजबूरी है कि जो बच्चे आरटीई में पढ़ते थे। उन्हें मैं अपने स्तर पर नए स्कूल में आरटीई में एडमिशन नहीं दे सकता। इसके लिए शिक्षा विभाग को कुछ करना होगा। नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर हमें आदेश मिलता है तो हमें बच्चों को प्रवेश देने में कोई दिक्कत नहीं है। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में हादसा इंदौर के कनाड़िया इलाके में शिशुकुंज स्कूल में शुक्रवार दोपहर हादसा हो गया। यहां लैब में केमिकल गिरने के चलते कुछ बच्चे और टीचर घायल हो गए। हालांकि स्कूल प्रशासन ने उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दे दिया। किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई है। सोशल मीडिया पर वायरल सूचना के बाद पुलिस अफसर भी जांच के लिए स्कूल पहुंचे।पूरी खबर पढ़ें


