आरबीएम के कैंसर मरीजों में 40 फीसदी मुख व गले कैंसर के ही रोगी

भास्कर न्यूज| भरतपुर विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को है और इसका उद्देश्य इस दिन लोगों को जागरुक करना है। जिले में सर्वाधिक मुंह और गले के कैंसर बढ़ रहा है, क्योंकि लोग तंबाकू व धूम्रपान की अपनी गलत आदतें नहीं छोड़ रहे हैं और जिंदगी दाव पर लगा रहे हैं। तंबाकू उत्पादों की पैकिंग पर स्पष्ट वैधानिक चेतावनी ‘तंबाकू से मुंह का कैंसर होता है’ तथा ‘स्मोकिंग कॉजेज थ्रोट कैंसर’ लिखी होती है और भयावह चित्र भी प्रकाशित किए जाते हैं, इसके बावजूद लोग लत के कारण जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। आरबीएम अस्पताल की कैंसर यूनिट में पिछले साल कैंसर के जितने रोगी आए, उनमें सर्वाधिक करीब 40 फीसदी मुख व गले कैंसर के ही रोगी आए हैं। पिछले साल वर्ष 2025 में कुल 74 नए कैंसर रोगी आए, जिनमें 27 मरीज मुख व गला कैंसर से पीड़ित आए। इनके अलावा फेंफड़े के 14 मरीज, स्तन कैंसर के 10, गर्भाशय द्वार का कैंसर के 02, अन्य प्रकार 21 मरीज थे। यहां खास बात ये भी है कि अस्पताल की कैंसर यूनिट की ओपीडी में महिलाओं से ज्यादा पुरुष मरीज ही आ रहे हैं, जहां कुल 2464 मरीज आए, जिनमें 1581 पुरुष और 883 महिला रोगी इलाज के लिए आए। इनमें कीमोथैरेपी के 917 मरीज, पैलियेटिव केयर के 231 मरीज आए, जो कि कीमो कराने बाद बीच में या दिखाने के बाद दिक्कत होने पर दिखाने आए आैर 74 नए मरीज आए। {स्टेज 1 – सर्जरी अथवा रेडियो थैरेपी {स्टेज 2- सर्जरी व रेडियो थैरेपी {स्टेज 3 व 4- सर्जरी, रेडियो थैरेपी व कीमो थैरेपी नोट… आरबीएम अस्पताल में कीमोथेरेपी, सीटी स्केन, बायोस्पकी, खून जांच, एक्सरे और सोनोग्राफी से कैंसर की पहचान और इलाज होता है, लेकिन रेडियो थैरेपी की सुविधा नहीं है। इसके लिए जयपुर या आगरा आना-जाना पड़ता है। किस साल कितने आए मरीज वर्ष कुल मरीज 2021 6077 2022 7341 2023 5665 2024 4024 2025 2464 स्रोत: आरबीएम मुख व गले का कैंसर खास तौर से धूम्रपान व गुटखा के सेवन से होता है: डॉ. चरन सिंह मुख व गले का कैंसर मुख्य रूप से तंबाकू उत्पादों जैसे गुटखा, पान मसाला, बीड़ी, सिगरेट व हुक्का के सेवन से होता है। मुंह में लंबे समय तक रहने वाले छाले, सफेद या लाल चकत्ते (ल्यूकोप्लाकिया/ एरिथोप्लाकिया), निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव, गले में लगातार खराश या सूजन ये सभी कैंसर के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। डॉ. चरन सिंह, कैंसर विशेषज्ञ ^अस्पताल में एक ही छत के ​नीचे कीमोथैरेपी, काउंसलिंग, पैलियेटिव केयर सहित कैंसर रोगियों की विभिन्न जांच व उपचार की मां योजना में नि:शुल्क इलाज उपलब्ध है। रेडियो थैरेपी की सुविधा शुरू करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। – डॉ. नगेंद्र भदौरिया, चिकित्सा अधीक्षक, आरबीएम अस्पताल।

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