झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां क्वालिटी एजुकेशन तो दूर, नियमित कक्षाओं का संचालन भी चुनौती बनता जा रहा है। राज्य के दो प्रमुख विवि रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) व डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) में लंबे समय से शिक्षक नियुक्ति के बिना ही काम चला रहे हैं। आरयू में पिछले 7 साल से असिस्टेंट प्रोफेसर की एक भी नियमित वैकेंसी नहीं निकली है। जबकि डीएसपीएमयू में पिछले 17 साल से शिक्षक नियुक्ति पूरी तरह ठप है। इसी बीच हर महीने शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, लेकिन उनकी जगह नई नियुक्ति नहीं हो रही। वित्तीय वर्ष 2026-27 में दोनों विवि में कुल 24 शिक्षक सेवानिवृत्त होंगे, जिससे पहले से शैक्षणिक और प्रशासनिक जर्जर व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय है। छात्रों की संख्या बनाम शिक्षक संकट
डीएसपीएमयू में चार शिक्षक रिटायर होंगे असर- शिक्षक आज किसी तरह व्यवस्था संभाल रहे हैं, उनकी संख्या भी तेजी से घटेगी। डीएसपीएमयू शिक्षकों की कमी का असर
असिस्टेंट प्रोफेसर के स्वीकृत पद : 977, खाली पद : 565, असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत : 412, प्रोफेसर के स्वीकृत पद : 47 , कार्यरत प्रोफेसर : 01, एसोसिएट प्रोफेसर : 120, एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत : शून्य आरयू : आधा दर्जन विषय बिना शिक्षक रांची यूनिवर्सिटी के कई कॉलेजों के आधा दर्जन से अधिक ऐसे विषय हैं, जिनमें एक भी नियमित शिक्षक नहीं है। नीड बेस्ड और अतिथि व्याख्याता या एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। स्नातकोत्तर स्तर पर रिसर्च, सेमिनार और गाइडेंस सीधे प्रभावित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन खुद मानता है कि यह व्यवस्था अस्थायी है, स्थायी समाधान नहीं। एडहॉक सिस्टम को मिल रहा बढ़ावा राज्य के विवि में स्थाई नियुक्ति नहीं होने से एडहॉक सिस्टम को बढ़ावा मिल रहा है। रिटायर शिक्षक की जगह अनुबंध शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। इसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन की रूचि भी अधिक है। क्योंकि आवश्यकता के अनुसार यूनिवर्सिटी स्तर पर अनुबंध आधारित शिक्षकों की नियुक्ति करने में इन्हें किसी प्रकार का समस्या नहीं है।


