आरएएस मुक्ता राव की ओर से कथित तौर पर भुगतान ना करने पर आर्किटेक्ट भारत सैनी द्वारा आत्महत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। भारत के पिता भानु प्रताप सैनी ने शनिवार को एफआईआर वापस ले ली। भास्कर ने उनसे इसकी वजह जाननी चाही तो उन्होंने चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिकायत वापस लेने के लिए उन्हें 41 लाख रुपए का भुगतान हुआ है। पुलिस को दी गई अर्जी में भानु प्रताप ने लिखा कि मैंने जानकारी के अभाव में जल्दबाजी में मुकदमा दर्ज करवाया था। अब उस प्रकरण में मैं पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं चाहता हूं। इसलिए मेरा मुकदमा वापस करें। इससे पहले सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी और सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस पत्र में लिखा था कि आर्किटेक्ट को भुगतान ना करने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पत्र में लिखा है कि- भारत कुमार सैनी को पूरा भुगतान किया जा चुका है। इतना ही नहीं, उसने हमसे उधार भी लिया था। यह हमें बदनाम करके ब्लैकमेल करने के लिए पूर्व सुनियोजित आपराधिक षडयंत्र के तहत किया गया कृत्य है। आरएएस लॉबी के चैट का स्क्रीनशॉट
इस पूरे मामले में आरएएस अधिकारियों की लॉबी मुक्ताराव के समर्थन में उतर आई है। अब एक स्क्रीन शॉट वायरल हो रहा है, जो कथित तौर पर उस ग्रुप का है, जिसमें आरएएस अधिकारी जुड़े हुए हैं। इन सभी चैट्स में स्पष्ट तौर पर मुक्ता राव का साथ देने की अपील की गई है। वहीं, एक चैट में तो यह तक लिखा है कि- ‘धन सभी को चाहिए, लेकिन काम कोई नहीं करना चाहता।’ एफआईआर वापस लेने का असर केस पर नहीं पड़ेगा : डीसीपी
“मृतक के पिता के केस वापस लेने का कोई असर नहीं पड़ेगा। टीम ने सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग जब्त कर ली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।”
-अमित कुमार, डीसीपी, वेस्ट पैसा एक दिन पहले क्यों नहीं दिया, अगर ऐसा होता तो बच जाती आर्किटेक्ट की जिंदगी भारत के पिता बोले-हम कहां तक लड़ पाते भास्कर-आपने एफआईआर वापस ली है, क्या ये सच है?
पिता : वो बड़े आदमी हैं। हम केस कहां लड़ पाते। समाज बंधुओं ने 41 लाख में समझौता करवा दिया।
भास्कर: 41 लाख रु. कौन देगा?
पिता : 41 लाख रुपए दिए जा चुके हैं।
भास्कर : किसने दिए?
पिता: वो जिसका मामला था।
भास्कर : क्या आरएएस मुक्ता राव ने पैसे दिए?
पिता : हां। मुक्ता राव ने।
भास्कर : पैसा नकद दिया या खाते में डाला?
पिता-नकद दिया।
भास्कर-आप पर कोई दवाब तो नहीं?
पिता-नहीं, मुझ पर किसी ने कोई दबाव नहीं डाला। तीन बड़े सवाल 1. क्या आत्महत्या मामले में FIR वापस ली जा सकती है?
कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसे अपराध समाज के खिलाफ होते हैं, जिनमें पुलिस स्वत: संज्ञान लेकर भी जांच कर सकती है या अदालत इस मामले की जांच के आदेश दे सकती है। माना जाता है कि मरते समय आदमी सिर्फ सच बोलता है। ऐसे में सुसाइड नोट सही है तो बिना परिवार की अनुमति के भी मामले की जांच हो सकती है। 2. इतना कैश कहां से आया?
यदि 41 लाख रुपए का भुगतान हुआ है, तो इतनी बड़ी राशि नकद कहां से आई है? 3. यदि आरएएस अफसर निर्दोष हैं तो कानूनी मदद क्यों नहीं ली?
यदि आरएएस मुक्ता राव का वह दावा सच था कि वे निर्दोष हैं और उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है तो उन्होंने इस मामले में कानून का रास्ता क्यों नहीं खटखटाया? इस संबंध में हमने मुक्ता राव से कॉल पर संपर्क साधने की कोशिश लेकिन उनका नंबर स्विच ऑफ था।


