जयपुर में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक ‘आर्मी डे परेड’ को लेकर झुंझुनू जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य सरकार के विजन के अनुरूप, जिले से 10 हजार लोगों को इस समारोह का साक्षी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों को जिम्मेदारी सौंपते हुए रूट चार्ट तैयार किया गया है। अभियान के तहत पहले चरण में 3 हजार महिलाओं और 11 जनवरी को 2 हजार विद्यार्थियों का दल जयपुर के लिए रवाना होगा। रात 2 बजे का सफर और सर्दी की चुनौती आयोजन की भव्यता के साथ-साथ कड़ाके की ठंड ने प्रशासन और अभिभावकों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। जयपुर में सुबह 7 बजे की रिपोर्टिंग का समय होने के कारण बसों को रात 2 बजे ही झुंझुनू से रवाना होना पड़ेगा। वर्तमान में चल रही शीतलहर और 4-5 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच बच्चों की इस यात्रा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता है। विशेषकर दूर-दराज के गांवों से आने वाले बच्चों को तो आधी रात को ही अपने घरों से निकलना होगा। पिकनिक की तरह लें यात्रा को जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने कहा है कि सेना की यह परेड दिल्ली के राजपथ जैसी भव्य होती है और इसे देखना गर्व की बात है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम में जाने के लिए किसी पर भी कोई प्रशासनिक दबाव या बाध्यता नहीं है, बल्कि लोगों को इसके लिए केवल प्रेरित किया गया है। उन्होंने कहा कि लोग इसे एक ‘पिकनिक’ और राष्ट्रभक्ति के उत्सव की तरह लें, जहाँ वे अपनी व्यवस्थाओं के साथ इस ऐतिहासिक पल का आनंद उठा सकें। बजट का अभाव, निजी स्तर पर प्रयास इस बार आयोजन में भोजन बजट के अभाव की बात भी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, पहले मिलने वाले डाइट भत्ते की जगह इस बार अधिकारियों को अपने स्तर पर व्यवस्थाएं करने को कहा गया है। ऐसे में प्रशासनिक अमला सीमित संसाधनों के बावजूद इस लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है ताकि जिले से जाने वाले प्रतिभागी बिना किसी असुविधा के ‘नो योर आर्मी’ प्रदर्शनी और 15 जनवरी को होने वाली मुख्य परेड का हिस्सा बन सकें।


