आलीराजपुर जिले में कथित अवैध धर्मांतरण के विरोध में सोमवार को आदिवासी समाज ने रैली निकाली। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से एकत्रित हुए और प्रशासन से अवैध धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। आंदोलनकारी भगवान बिरसा मुंडा और छींतू किराड़ की प्रतिमा स्थल पर जमा हुए। यहां से उन्होंने नगर में लगभग 5 किलोमीटर का पैदल मार्च करते हुए बस स्टैंड चौराहा तक रैली निकाली। इस दौरान पारंपरिक ढोल-मांदल बजाए गए और धर्मांतरण के खिलाफ नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने धर्मांतरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रशासन को चेतावनी देने का संदेश दिया। सभा को संबोधित करते हुए आजम सिंह अवासिया, भदू पचाया, नरीन मोरी और कमरू अजनार सहित अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिले में लंबे समय से ईसाई मिशनरियां ग्रामीणों को शिक्षा, इलाज, रोजगार और आर्थिक सहायता जैसे प्रलोभन देकर धर्मांतरण करा रही हैं। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि इन गतिविधियों से आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराएं, रीति-रिवाज और पहचान खतरे में पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि बाहरी तत्वों और पादरियों को गांवों में प्रवेश न दिया जाए और अवैध चर्चों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में आदिवासी संस्कृति समाप्त हो सकती है। एसडीएम को सौंपा ज्ञापन रैली के समापन पर आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम तपिश पांडेय को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(5) और 19(6) का उल्लंघन करते हुए जिले में कई वर्षों से अवैध चर्च संचालित हो रहे हैं। इन चर्चों के माध्यम से ‘चंगाई मीटिंग’ और प्रार्थना सभाओं के नाम पर धर्मांतरण की गतिविधियां चलाई जा रही हैं। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि आदिवासी समाज के गरीब और भोले-भाले लोगों को झूठे प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रशासन को कुछ पादरियों और पास्टरों की सूची भी सौंपी गई, जिन पर पूर्व में भी अवैध धर्मांतरण के मामले दर्ज होने का उल्लेख है।


