कालवाड़ रोड पर बियानी ग्रुप के ट्रस्ट की ओर से बनाए जा रहे रीजन ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में एक के बाद एक अनियमितता समाने आ रही है। पहले बियानी ग्रुप के ट्रस्ट जयपुर रूरल हैल्थ एंड डवलपमेंट ट्रस्ट ने पुरानी बिल्डिंग को दिखाकर फर्जी तरीके से आरटीओ अफसरों से मिलकर ~5 करोड़ का फर्जी तरीके से फंड उठा लिया। अब जयपुर रूरल हैल्थ एंड डवलपमेंट ट्रस्ट जिस पुरानी बिल्डिंग को ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर बता रहा है, यह बिल्डिंग ट्रैक से 200 मीटर दूर पर है, जबकि बिल्डिंग ड्राइविंग ट्रैक और आवंटित जमीन पर ही बननी थी। इसके अलावा जिस जमीन को ट्रस्ट ने ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय को लीज पर दी है, यह जमीन सरकार की ओर से रियायती दर पर शिक्षण संस्थान खोलने के लिए आवंटित की गई है। ऐसे में जमीन पर रीजन ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खुल सकता है या नहीं, इसे लेकर भी विवाद है। प्रदेश में सड़क हादसों में रोज करीब 32 लोगों की मौत हो रही है। इसके बावजूद अधिकारी ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर को लेकर गंभीर नहीं है। बियानी परिसर में बनने वाला ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर पहली किश्त जारी होने के बाद 18 महीने में बन कर तैयार होना था, लेकिन 3 साल में भी तैयार नहीं हुआ है। वहीं ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर को फर्जी तरीके से फंड जारी करने में संबंधित क्षेत्र के आरटीओ और उप परिवहन आयुक्त, योजना एवं विकास शाखा के अधिकारियों अहम भूमिका रही है। बियानी ट्रस्ट पर क्यों मेहरबान हैं परिवहन विभाग के अफसर फंड उठाने के बाद भी जयपुर रूरल हैल्थ एंड डवलपमेंट ट्रस्ट पर आरटीओ सहित परिवहन अधिकारी मेहरबान हैं। जांच में यह साबित हो चुका है कि मौके पर बिल्डिंग नहीं मिली, काम चलता मिला है। इसके बावजूद भी अधिकारी ट्रस्ट पर कार्रवाई करने की अपेक्षा मामले को दबाने में लगे हुए हैं। जांच के लिए 17 नवम्बर को कमेटी गठित की थी, जिसने 18 दिन बाद भी उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट नहीं सौंपी है। ऐसे में जांच अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ रहे हैं।


