आशा सहयोगिनियों ने सरकार से की राहत की गुहार:न्यूनतम 18 हजार वेतन, पदोन्नति व सेवानिवृत्ति योजना लागू करने की मांग

ब्यावर की आशा सहयोगिनियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार से अपील की है। उन्होंने बजट घोषणा 2026-27 में ठोस प्रावधान करने की मांग उठाई है। आशा सहयोगिनी संगठन राजस्थान के बैनर तले जिले की आशा सहयोगिनियों ने एकजुट होकर सरकार को 6 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा, जिसमें आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
संगठन की प्रदेशाध्यक्ष निर्मला सेन ने बताया कि राजस्थान में वर्तमान में लगभग 53,563 आशा सहयोगिनी कार्यरत हैं। इनका चयन दिसंबर 2003 से किया गया था। प्रारंभिक दौर में उन्हें 500 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था, जबकि वर्तमान में उन्हें केवल 4,959 रुपये प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि मिल रही है। यह राशि उनके कार्यभार, जिम्मेदारियों और सेवाओं की तुलना में कम है। संगठन की प्रमुख मांगों में बजट सत्र 2026-27 में न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्हें राजस्थान संविदा सेवा नियम 2022 में शामिल करने, पदोन्नति एवं वेतन वृद्धि की स्पष्ट व्यवस्था करने, योग्यता व अनुभव के आधार पर आशा सुपरवाइजर एवं एएनएम पदों पर समायोजन करने, तथा सेवानिवृत्ति राशि योजना लागू करने की मांग की गई है। संगठन पदाधिकारियों ने यह भी बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1 जनवरी 2021 को जारी आदेश के तहत प्रशिक्षण में आशा सहयोगिनियों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान था। हालांकि, इसका लाभ अब तक पूरी तरह नहीं मिल पाया है। इसलिए, योग्य एवं अनुभवी आशा सहयोगिनियों को एएनएम पदों पर कोटा निर्धारित कर नियुक्ति देने की मांग की गई है, ताकि उनकी वरिष्ठता और योग्यता का उचित उपयोग हो सके।
संगठन ने वर्ष 2004 से सेवाएं दे रहीं आशा सहयोगिनियों की लगभग 22 सालों की दीर्घ सेवा को देखते हुए सेवानिवृत्ति योजना लागू करने की भी मांग की है। इस योजना से सेवा पूर्ण होने पर उन्हें एकमुश्त राशि मिल सकेगी और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी। आशा सहयोगिनी संगठन ने राज्य सरकार से अपील की है कि बजट 2026-27 में उनकी सभी मांगों को सम्मिलित किया जाए। इससे हजारों आशा सहयोगिनियों को सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व प्रदान किया जा सकेगा।

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