रांची नगर निगम में काम करने वाले वैसे कर्मचारी, जिनकी माैत हाे गई है, उनके आश्रित अनुकंपा पर नाैकरी की मांग काे लेकर अनशन पर बैठे हैं। पिछले तीन दिनाें से अनशन पर बैठे आश्रितों में कई की तबीयत बिगड़ने लगी है। शुक्रवार काे अचानक चार आश्रितों की तबीयत बिगड़ गई। इंदू गाड़ी, रीमा कुमारी, रजनी तिर्की सहित एक अन्य आश्रित बेसुध हाे गईं। बेसुध हाेते ही तुरंत सदर अस्पताल काे सूचना दी गई। आनन-फानन में एंबुलेंस सहित मेडिकल टीम माैके पर पहुंची। बेसुध हुई आश्रित महिलाओं काे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका इलाज शुरू हुआ। खाना-पानी नहीं खाने की वजह से उनका बीपी और शुगर लेवल गिर गया था। उन्हें स्लाइन चढ़ाया गया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई। इधर, अनशन पर बैठे अन्य आश्रितों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नरेश राम ने कहा कि आश्रितों की नियुक्ति नहीं हाे रही है। पारिवारिक पेंशन का लाभ भी नहीं मिल रहा है। पिछले दस सालाें से अधिक समय से आश्रित अपनी मांगाें काे लेकर आंदाेलन कर रहे हैं। कई बार नगर अधिकारियों काे मांग पत्र साैंपा गया, लेकिन समाधान नहीं निकला। बच्चाें की पढ़ाई, इलाज कराना भी हुआ मुश्किल अनशन पर बैठे आश्रितों ने बताया कि पारिवारिक पेंशन बंद हाेने से घर की आर्थिक स्थिति खराब हाे रही है। बच्चाें की पढ़ाई कराना मुश्किल है। तबीयत बिगड़ने पर इलाज कराना भी कठिन हाे गया है। अनशन पर बैठी मुन्नी ने बताया कि 2010-2011 में पद शून्य होते हुए भी बहाली की गई है। 2018 में पद स्वीकृत होने के बाद 2010-11 में बहाल हुए कर्मी का समायोजन किया गया था, जिसमें नगरीय प्रशासन निदेशालय द्वारा सहमति दी गई थी। इसी के अनुसार हमारी भी बहाली तृतीय वर्ग एवं चतुर्थ वर्ग में हाेनी चाहिए। अनशन पर बैठे मो. शाहनवाज ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक हमलोग हड़ताल पर बैठे रहेंगे। वहीं सुभाष उरांव ने बताया कि 2011 में पिता का निधन हो गया था। अनुकंपा पर न तो नौैकरी मिली न ही पेंशन। रेखा देवी ने कहा कि पति का निधन हो गया है। अपनी मांगों को लेकर कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।


