साल 2023 में दुमका जिले के मयूराक्षी नदी पर झारखंड का सबसे लंबा पुल बनाया गया। साल 2018 में शुरु हुए इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई चुनौतियां आईं। नदी में हमेशा पानी होता था, इसके कारण सुपर स्ट्रक्चर को लॉन्च करने के लिए पैंट्री का इस्तेमाल किया गया। 2340 मीटर लंबे इस पुल के मध्य में पुल की चौड़ाई ज्यादा रखी गई है। ताकि लोग गाड़ी खड़ी कर नजारे का लुत्फ उठा सके, अंत में चौड़ाई कम है। पुल बनने से पहले मुकरमपुर से दुमका जिला मुख्यालय की दूरी 30 किलोमीटर से भी अधिक थी। अब यह दूरी मात्र 15 किलोमीटर की ही है। पुल बनने से दर्जनों गांव के लोगों की दूरियां मिट गईं। हजारीबाग-पटना-रांची रोड, जो एनएच-18 का हिस्सा था, झारखंड से गुजरने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग है। साल 2010 में कुजू में जमीन के नीचे आग लगी, जिसके कारण सड़क ध्वस्त हो गई। भूमिगत आग के कारण यातायात को सुरक्षित रूप से निकालने के लिए एक डायवर्सन मार्ग बनाया गया, इसे कुजू डायवर्सन का नाम दिया गया। झारखंड में पहली बार पहाड़ को काटकर सड़क का निर्माण करना था। डायवर्सन बनाने में 4 लाख एसक्यू पत्थरों का खनन किया गया। इसके बाद 1.15 किलोमीटर का यह डायवर्सन सालभर के अंदर तैयार किया गया।
सिटी एंकर मयूराक्षी नदी बने पुल से दर्जनों गांव के लोगों की दूरियां मिटीं अभिनेंद्र कुमार, सेवानिवृत मुख्य अभियंता, एनएच विंग मनोज कुमार वर्मा, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता 4 लाख एमक्यू पत्थरों का खनन कर बना डायवर्सन रितू लकड़ा . रांची | आज पूरा देश इंजीनियर्स डे मना रहा है। यह केवल सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती नहीं, बल्कि यह उस दूरदर्शी सोच को याद करने और विचारने का दिन है जिसने भारत को आज तकनीकी उन्नति के पथ पर अग्रसर राष्ट्र बनाया है। वर्तमान समय में हमारे इंजीनियर नए अवसरों और चुनौतियों के बीच संतुलन साधते हुए नए आयाम रच रहे हैं। जानते हैं रांची के दो इंजीनियरों के ऐसे ही अद्भुत कार्यों को… टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से देश की तस्वीर और तकदीर बदल रहे हमारे इंजीनियर


