इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत पौंग डैम के 49% पानी की हिस्सेदारी होने के बाद भी 62 साल से राजस्थान स्थायी सदस्य नहीं बना। राजस्थान भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में स्थायी सदस्य बनने की जंग लड़ रहा है मगर पंजाब के दबाव में केन्द्र सरकार के आने से निर्णय नहीं हुआ। अभी भी बोर्ड में दो सदस्यों के पद रिक्त हैं। बीते 62 सालों से बीबीएमबी में स्थायी सदस्यता पंजाब-हरियाणा को ही मिलती रही। कारण ये कि हमारे किसी प्रतिनिधि ने नियमों को ठीक से पढ़ा ही नहीं। पंजाब जिस रिऑर्गनाइजेशन एक्ट के सेक्शन 79 के मुताबिक खुद को स्थायी सदस्य का दावा करता रहा है उसे भी न तो केन्द्र ने सरकार समझा न तो दिल्ली में राजस्थान की नुमाइंदगी करने वालों ने। उस नियम में स्पष्ट लिखा है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में से कहीं के सदस्य स्थायी बन सकते हैं। इसकी नियुक्ति का हक केन्द्र को है। जिद के आगे पंजाब और हरियाणा ही स्थायी सदस्य बनते रहे। 2020 में जब भास्कर ने इस मामले को उठाया था तो तत्कालीन केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इसे समझने के लिए तमाम अधिकारियों को दिल्ली बुलाया। तब स्पष्ट हुआ कि राजस्थान भी इसका हकदार है मगर पंजाब की सियासत के आगे राजस्थान फिर फेल हो गया। राजस्थान को नुकसान क्या बीबीएमबी में राजस्थान का स्थायी सदस्य ना होने से वाटर रेग्युलेशन कमेटी में पंजाब अपनी मनमर्जी से फैसले करता है। यूं तो हनुमानगढ़ के चीफ इंजीनियर को इसमें सदस्य रखा है मगर फैसले पंजाब ही करता है। इस वजह से अपनी सुविधा के हिसाब से पौंग डैम में पानी की निकासी तय होती है। इसके अलावा हरिके बैराज पर पानी की बंदरबांट होती है। जिसे राजस्थान के अभियंता फ्लक्चुएशन कहकर छोड़ देते हैं उसी फ्लक्चुएशन की आड़ में पंजाब राजस्थान के हिस्से का हजारों क्यूसेक पानी ले लेता है। हरिके बैराज पर राजस्थान में पानी छोड़ने के लिए जो 7 गेट हैं पंजाब ने उसमें से 2 गेट स्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। ऊपर से बीच में एक धार्मिक स्थल और बन गया। ऐसे में राजस्थान सिर्फ 5 गेटों से ही पानी ले पा रहा है। हरिके पर अभी भी मैन्युअली ही पानी की माप होती है जबकि राजस्थान स्काडा की मांग उठा रहा है। खबर है कि बीबीएमबी में अभी 2 स्थायी पद रिक्त हैं। इसकी नियुक्ति केन्द्र को करनी है। सूत्र बताते हैं कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने नियमों में संशोधन कर बीबीएमबी में 3 स्थायी सदस्य करने का सुझाव देते हुए राजस्थान को जगह देने की कोशिश की मगर पंजाब इस पर भी राजी नहीं है। हैरानी की बात ये है कि केन्द्र भी पंजाब के दबाव में आकर चुप बैठ गया। उसके पीछे वहां का किसान आंदोलन भी वजह बताई जा रही है। पूर्व पीएम देसाई के सामने उठा था मुद़्दा पंजाब से बीबीएमबी की लड़ाई कोई आज की नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सामने भी ये मुद्दा उठा था। राजस्थान के पूर्व सिंचाई मंत्री देवी सिंह भाटी ने बताया कि मोरारजी देसाई जब प्रधानमंत्री थे तब ये मुद्दा राजस्थान के सामने पहली बार उठा था। वे ज्यादा समय तक रहते तो शायद मामला हल हो जाता। हम भी तीन दशक से ये मांग उठा रहे हैं। पूर्व चेयरमैन ने माना था नियुक्ति का हक केन्द्र को बीबीएमबी के पूर्व चेयरमैन डीके शर्मा ने भी माना था कि बीबीएमबी में स्थायी सदस्य कौन होगा इसका फैसला केन्द्र सरकार को करना है। केन्द्र पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में से किसी को सदस्य बना सकता है। जैसे राजस्थान कभी स्थायी सदस्य नहीं रहा वैसे ही हिमाचल भी नहीं रहा। जबकि पौंग डेम में राजस्थान 49, पंजाब 23, हिमाचल प्रदेश 16 और हरियाणा की 12 प्रतिशत पानी की हिस्सेदारी है।


