रामपुरिया आइस फैक्ट्री में अमोनिया गैस के रिसाव के कारण आस-पास रहने वाले लोगों में भगदड़ मच गई। महिलाएं और बच्चों को लेकर पुरुष घरों से दूर सुरक्षित स्थान पर चले गए। घबराहट होने पर फैक्ट्री मैनेजर को पीबीएम हॉस्पिटल ले गए। करीब एक घंटे में रिसाव पर काबू पाया जा सका। रोशनी घर के पास विनोबा बस्ती स्थित रामपुरिया आइस फैक्ट्री में सुबह 10.30 बजे अचानक वाटर पूल कंडंसर (पाइप) में लीकेज होने के कारण अमोनिया गैस प्रेशर के साथ बाहर आने लगी। इससे आस-पास के लोगों की आंखों में जलन शुरू हो गई। महिलाओं- बच्चों का भी दम घुटने लगा। करीब पांच हजार की आबादी में अफरा-तफरी मच गई। आस-पास के 50 से अधिक घर खाली हो गए। प्रत्यक्षदर्शी महेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी रीना अस्थमा की मरीज है। गैस के कारण बेहोशी छाने लगी तो उसे रिश्तेदार के यहां छोड़कर आना पड़ा। युनूस अली, जयकिशन, कमल पंवार, पवन पंडित, जयकिशन, कालूराम, जयनारायण, गोपी बारासा ने बताया कि हवा के रुख के कारण गैस की गंध तेजी से फैल रही थी। यदि रात के समय लीकेज हो गया तो लोग सोते ही रह जाएंगे। फैक्ट्री का निर्माण 1944 में हुआ था। अब यह घनी आबादी क्षेत्र में आ गई है। सूचना मिलते ही सबसे पहले सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एसएचओ दिगपाल सिंह मोहल्ले के लोगों को यह कहकर लौट गए कि गैस लीकेज में उनका कोई काम नहीं है। कर्मचारी अशोक पांडिया ने बताया कि मैनेजर हनुमानमल गुलगुलिया हार्ट के मरीज हैं। घबराहट होने पर उन्हें पीबीएम भेज दिया गया। वहां से घर चले गए। मालिक महेंद्र बेद कोलकाता रहते हैं। कर्मचारियों ने बताया कि पहले भी एक बार गैस लीक हो चुकी है। गैस रिसाव की सूचना पर प्रशासन में हड़कंप मच गया। तहसीलदार, फूड सेफ्टी अधिकारी तथा फैक्ट्री और बॉयलर विभाग के दलों ने फैक्ट्री पहुंच कर जांच पड़ताल की। रामपुरिया आइस फैक्ट्री में मिली खामियां रामपुरिया आइस फैक्ट्री के उपकरणों की जांच दो साल से नहीं हो पाई है। नियमानुसार हर साल उपकरणों की जांच अधिकृत इंजीनियर से करवाकर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट लेना होता है। फैक्ट्री का ट्रेड लाइसेंस भी एक साल से रिन्यू नहीं करवाया गया है। फैक्ट्री एवं बॉयलर विभाग की वरिष्ठ निरीक्षक सृष्टि गुप्ता ने बताया कि अभी जांच जारी है। अमोनिया से जान का खतरा वैसे तो सामान्य तौर पर अमोनिया नुकसानदायक नहीं होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा में सूंघ ली जाए तो जान तक जा सकती है। हवा में अमोनिया की मात्रा बढ़ने पर घुटन का एहसास होने लगता है। इसकी ज्यादा मात्रा होना गले, नाक और सांस की नली में जलन का कारण बन जाती है। लगातार इसके संपर्क में रहने पर त्वचा में जलन, आंख में स्थायी क्षति या अंधापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नीरू गुप्ता, एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री, एमएस कॉलेज किस फैक्ट्री का लाइसेंस कब तक 82 आइस फैक्ट्रियां, लाइसेंस 9 को जिले में करीब 82 छोटी-बड़ी आइस फैक्ट्रियां जिला उद्योग केंद्र में पंजीकृत हैं। विभाग की महाप्रबंधक मंजू नैण गोदारा ने बताया कि नगरीय क्षेत्र में करीब 45 आइस फैक्ट्रियां हैं। इनमें से कुछ आइसक्रीम बनाती हैं तो कुछ केवल बर्फ बनाने का कारोबार करती हैं। दोनों का रजिस्ट्रेशन ऑन लाइन ही होता है। अधिकांश बंद पड़ी हैं। नगर निगम उपायुक्त यशपाल आहूजा ने बताया कि निगम से केवल नौ फैक्ट्रियों ने सालों पहले ट्रेड लाइसेंस बनवाए थे, जिनमें से 6 ने वापस रिन्यू नहीं करवाए। इसलिए हुआ रिसाव फैक्ट्री एवं बॉयलर विभाग की वरिष्ठ निरीक्षक सृष्टि गुप्ता ने बताया कि आइस फैक्ट्री में पानी को ठंडा करके बर्फ बनाने के लिए वाटर पूल कंडंसर लगे हुए हुए हैं। यह एक तरह के पाइप होते हैं जिनमें अमोनिया गैस और पानी चलता रहता है। एक कंडंसर के वाल्व की गास्केट फटने के कारण गैस पूरे प्रेशर से लीक होने लगी। करीब पौन घंटे तक गैस लीक हुई है। फैक्ट्री का ऑपरेटर उस वक्त बाहर गया था। वहां मौजूद कर्मचारी अशोक पांडिया ने एक निजी डेयरी के चीलिंग प्लांट से इंजीनियर को बुलाकर वाल्व ठीक करवाया। फैक्ट्री में सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है।


