इंदौर का 2047 विजन जनसंवाद में लोगों की नाराजगी:देर से सुझाव मांगने पर कम लोग पहुंचे; अधिकांश समय खाली ही रहा हॉल

इंदौर में सोमवार को आयोजित 2047 के विजन डॉक्यूमेंट पर पहला जनसंवाद फीका रहा। इसका मुख्य कारण प्रबुद्ध नागरिकों को कार्यक्रम की सूचना देर से देना रहा। रवींद्र नाट्य गृह में हुए इस कार्यक्रम में आमंत्रित नागरिकों की संख्या हॉल की क्षमता की तुलना में 25% भी नहीं थी। अधिकांश समय हॉल खाली ही नजर आया। प्रशासन को उम्मीद थी कि निमंत्रित सारे लोग आएंगे लेकिन उलटा हुआ। इसमें जन प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों और एनजीओ के पदाधिकारियों की संख्या काफी कम थी। इसके चलते कार्यक्रम समय से आधे घंटे से ज्यादा विलंब से शुरू हुआ। सभी की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि देर से सुझाव मांगे गए। कई लोगों का मानना था कि कार्यक्रम में इंदौर के लिए विजन तय करने को लेकर था लेकिन यह ज्यादातर मप्र पर केंद्रित था। नारेबाजी के साथ बायकॉट की चेतावनी दोपहर को प्रशासन को उम्मीद थी कि अभी और लोग आ सकते हैं लेकिन देरी होने से लोगों की नाराजगी बढ़ती गई। कार्यक्रम का समय दोपहर 3 बजे निर्धारित था लेकिन आधा घंटे तक शुरू नहीं हुआ तो हॉल में उपस्थित इंदौर उत्थान अभियान समिति के सदस्य, बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार वर्मा, श्रीनिवास कुटुंबले सहित अन्य ने नाराजगी जताने के साथ जल्द शुरू करने की मांग की। फिर नारेबाजी के साथ चेतावनी भी दे दी कि 4 बजे तक कार्यक्रम शुरू नहीं किया तो सभी चले जाएंगे। मामले में समिति अध्यक्ष अजीत सिंह नारंग ने मंच के पीछे बैठे अधिकारियों को स्थिति बताने के साथ ही सदस्यों को भरोसा दिलाया कि कार्यक्रम जल्द शुरू होगा। कुछ देर बाद मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने संबोधन शुरू किया। लोगों ने दिए सुझाव सुरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि मास्टर प्लान लागू करने में देरी से विकास नहीं हो पा रहा है। पीपल्याहाना तालाब को गायब ही कर दिया गया। श्रीनिवास कुटुंबले का कहना था कि विजन को लेकर क्लियर नहीं है, हम कितने जागरूक हैं, यहां की उपस्थिति यह बयां कर रही है। इस कार्यक्रम में इंदौर उत्थान के सदस्य ही ज्यादा थे। अधिकांश सीटें खाली हैं। उन्होंने कहा कि अब शहर में मल्टी लेयर फ्लाई ओवर बनाने की जरूरत है। इस पर विचार करना होगा। ‘चालक परिवार के उत्थान के लिए भी सोचें’ इन्दौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष सीएल मुकाती ने कहा कि भविष्य में भारी वाहन चालकों की कमी हो जाएगी। चालक परिवार के उत्थान के लिए भी सोचें। एक्सीडेंट की रेशो कम करने में मदद मिलेगी। कीर्ति राणा ने कहा कि, विजन लागू करने के लिए अब जमीन कहां से लाएंगे। इसके लिए जंगल काटे जाएंगे, पर्यावरण की चिंता कौन करेगा। हमेशा दुहाई दी जाती है कि पेड़ काटने के एवज में फिर पेड़ लगाएंगे लेकिन क्या होता है, हकीकत सभी को पता है। दिनेश शुक्ला ने कहा कि इंदौर में नालंदा स्तर का वैदिक अभियांत्रिकी विवि हो। ‘प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को शहर से बाहर ले जाएं’ पीथमपुर औद्योगिक एसोसिएश के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने कहा कि, प्रदूषण रहित उद्योग, उपक्रम लगें। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को शहर से बाहर ले जाएं। पूर्व पार्षद भारत मथुरावाला ने कहा कि दाल, जिनिंग और आइल मिल महाराष्ट्र शिफ्ट हो रही है, इस पर विचार करना होगा। ‘बड़ी मंडियों को बाहर शिफ्ट करें’ अशोक बड़जात्या ने कहा कि कैंपस प्लानिंग नहीं, मजदूरों के आवास नहीं बन रहे, अवैध कॉलोनियों का नियमितिकरण क्यों नहीं। फार्मा इंडस्ट्री के पलायन पर ध्यान देना होगा। उस्मान पटेल ने सुझाव दिया कि छावनी अनाज मंडी शिफ्ट करें। पूर्वी क्षेत्र में भी चोइथराम जैसी मंडी विकसित करें। ईशाक चौधरी ने कहा कि जितनी भी बड़ी मंडियां हैं उन्हें शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में अभी से शिफ्ट करना होगा। ‘होलसेल कारोबारियों को मल्टीपर्पज बिल्डिंग में शिफ्ट करें’ धनंजय चिंचालकर ने कहा, हाट बाजारों के लिए जगह देनी होगी। कैलाश मूंगड़ ने सुझाव दिया कि होलसेल कारोबारियों को मल्टीपर्पज बिल्डिंग में शिफ्ट करें। ईश्वर बाहेती का कहना था कि पानी संग्रहण की बेहतर व्यवस्था हो। इंदौर में साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना हो पार्षद मनोज मिश्रा ने कहा कि पार्किंग को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा। डॉ. एसएल गर्ग ने सुझाव दिया कि मप्र शोध का गढ़ बने। इसके साथ ही साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना हो। एडवोकेट लोकेश भटनागर ने कहा कि जल, वन प्रकाश संरक्षण पर गहराई से विचार करना होगा। शरद पंवार ने कहा कि इंदौर को एम्स जैसा हॉस्पिटल की जरूरत है।

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