इंदौर जिला प्रशासन ने 2335 सेक्टर-ई सुदामा नगर स्थित यशलोक हॉस्पिटल में अनियमितता पाए जाने पर उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया है। कुछ समय पहले हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही के कारण महिला की मौत हो जाने की शिकायत मिली थी। कलेक्टर आशीष सिंह शिकायत पर सीएमएचओ डॉ. बीएस सैत्या को टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। जांच में पाया कि यशलोक हॉस्पिटल द्वारा मेटरनिटी और लेबर रूम की पात्रता न होने पर भी हॉस्पिटल में ये सेवाएं दी जा रहीं थी। निरीक्षण के दौरान भी हॉस्पिटल में मध्य प्रदेश नर्सिंग होम अधिनियम के अनुरूप रिकाॅर्ड मेंटेन करना नहीं पाया गया, न ही इस प्रकार के ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल उपयुक्त पाया है। जांच के दौरान स्टाफ के सत्येंद्र सिकरवार और भावना शर्मा ने जांच समिति को बताया कि यशलोक हॉस्पिटल को डॉ. अक्षत लाहोटी से किराए पर लेकर संचालित किया जा रहा है। साथ ही वे बीईएमस योग्यताधारी होकर अपने नाम के आगे डॉक्टर नाम का उपयोग कर रहे थे। यह कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा संस्थान (नियंत्रण) अधिनियम 1973 की धारा 7-ग का उल्लंघन है। इस धारा का उल्लंघन करने पर सत्येंद्र सिकरवार और भावना शर्मा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है। उपचार करने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ व एनीस्थिशिया एक्सपर्ट को भविष्य में और अधिक सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है। प्रशासन द्वारा मध्य प्रदेश उपचर्या और रुजोपचार संबंधित स्थापना अधिनियम 1973 के नियम 14, 16 और 17 के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के फलस्वरूप अधिनियम 1973 की धारा 6 (1) के तहत रजिस्ट्रेश निरस्ती का पत्र जारी कर तत्काल अस्पताल को बंद करने की कार्यवाही की गई ।


