इंदौर चूहा कांड में आज हाईकोर्ट में सुनवाई:सरकार पेश कर चुकी रिपोर्ट; डीन- सुपरिटेंडेंट को हटाने को लेकर आंदोलन की तैयारी में जयस

इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के नवजातों को काटे जाने की घटना को लेकर आज, 6 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई 15 सितंबर को हुई थी, जिसमें राज्य शासन ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में यह कहा गया कि दोनों नवजात शिशुओं की मौत चूहों के काटने (रेट बाइट) से नहीं हुई। धार के एक दंपती की बच्ची की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह सामने आया कि उसके अंग पूरी तरह विकसित नहीं थे और उसे अन्य बीमारियां भी थीं। इसके साथ ही, अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल का काम करने वाली एजाइल कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस दिया गया है। शासन ने माना कि रेट बाइट की घटना गंभीर है और भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए एमवाय अस्पताल की PICU और NICU यूनिट्स को सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शिफ्ट करने का फैसला किया गया है। तब तक इन यूनिट्स में फ्यूमिगेशन और पेस्ट कंट्रोल करवाया जाएगा। इधर, जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) डीन, सुपरिंटेंडेंट और अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई चाहता है। वह एक बार आंदोलन की तैयारी में है। दो दिन में दो घटनाएं, कार्रवाई की बात रिपोर्ट में रिपोर्ट के अनुसार, पहली घटना 30 अगस्त की सुबह 4 बजे और दूसरी घटना 31 अगस्त की रात 10:30 बजे हुई थी। जांच में यह देखा गया कि पहली घटना के बाद क्या-क्या कदम उठाए गए और किसकी गलती से दूसरी घटना हुई। जिन कर्मचारियों ने समय पर रिपोर्ट नहीं दी या जिनकी मौजूदगी में लापरवाही हुई, उन पर विभागीय कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने गाइडलाइन के पालन पर जोर दिया सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शासन की ओर से जो पैरामीटर और गाइडलाइन तय की गई हैं, उनका सख्ती से पालन होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अलग से निगरानी अथॉरिटी भी बनाई जा सकती है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जयस अध्यक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा ने बताया कि संगठन डीन, सुपरिंटेंडेंट और अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई चाहता है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने इस मामले में आंदोलन को रोकने की बात कहते हुए कहा था कि मामला हाई कोर्ट में है, इसलिए 6 अक्टूबर तक आंदोलन स्थगित किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि भोपाल से आई राज्य शासन की जांच कमेटी (जिसकी अध्यक्षता आईएएस योगेश भरसट ने की) की रिपोर्ट को सरकार सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब हाई कोर्ट ने शासन से जवाब मांगा, तब भी यह रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई। शासन ने कोर्ट के सामने जो दस्तावेज दिए, उनमें इस रिपोर्ट का जिक्र जरूर है लेकिन पूरी रिपोर्ट नहीं दी गई। ‘एफआईआर से बचने के लिए रिपोर्ट छिपा रहे’ मुजाल्दा ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य स्तर की रिपोर्ट में ऐसे तथ्य हो सकते हैं जिनसे डीन और अधीक्षक की लापरवाही साबित होती हो। इसलिए सरकार रिपोर्ट को दबा रही है ताकि एफआईआर न हो सके। उन्होंने बताया कि मृतक बच्ची के पिता देवाराम ने संयोगितागंज थाने में आवेदन दिया है और राज्य शासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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