इंदौर बीजेपी पार्षद निशा देवलिया को सुप्रीम कोर्ट से राहत:वार्ड 44 की पार्षद बनी रहेंगी, दो साल पुराना चुनावी विवाद खत्म

इंदौर नगर निगम के वार्ड 44 की भाजपा पार्षद निशा देवलिया को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिल गई है। इसके साथ ही उनके निर्वाचन को लेकर पिछले दो साल से चल रहा विवाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें देवलिया का निर्वाचन शून्य घोषित कर कांग्रेस प्रत्याशी को विजेता ठहराया गया था। इसी फैसले के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां से भी पार्षद को राहत मिल गई। दरअसल, नगर निगम चुनाव 2022 में वार्ड 44 से भाजपा प्रत्याशी निशा देवलिया ने 1084 मतों से जीत दर्ज की थी। इसके बाद कांग्रेस की रनर-अप प्रत्याशी नंदिनी मिश्रा ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए जिला कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि देवलिया ने नामांकन के दौरान दिए गए शपथ-पत्र में संपत्ति से जुड़ी जानकारी छुपाई और संपत्ति कर में विसंगतियां कीं। जिला कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था और कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी मान लिया था। इस आदेश के खिलाफ देवलिया ने हाईकोर्ट में अपील की। जस्टिस आलोक अवस्थी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों के तर्क और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद जिला अदालत के फैसले को असंगत ठहराते हुए रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्वाचन शून्य घोषित करने और दूसरे प्रत्याशी को विजेता ठहराने का आधार टिकाऊ नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद नंदिनी मिश्रा सुप्रीम कोर्ट पहुंची। जहां से भी पार्षद निशा देवलिया को राहत मिल गई। इसके साथ ही वार्ड 44 के चुनाव को लेकर चल रहा विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया। यह था मामला

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