गठिया सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं बच्चों को भी होता है। बस बच्चों में इसके लक्षण पहचानना मुश्किल होता है। इस कारण समय से इलाज नहीं हो पाता है। यह बात नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ पीडियाट्रिक रुमेटोलॉजी (NCPR 2025) में आए विशेषज्ञों ने बताई। उन्होंने कहा कि छह हफ्तों तक लगातार बुखार रहता है और बच्चे पर एंटीबायोटिक का असर नहीं होता है तो यह गठिया रोग का संकेत हो सकता है। देश की 23वीं और इंदौर की पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस में देशभर से 250 विशेषज्ञ आए हैं। इनमें 125 से अधिक पीडियाट्रिक रुमेटोलॉजिस्ट हैं। तीन दिनी इस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया कि माता-पिता के साथ ही अभी डॉक्टर भी बच्चों में गठिया रोग को लेकर जागरूक नहीं हैं। जबकि सामान्य ब्लड टेस्ट से पता चल सकता है कि बच्चे को गठिया रोग के संकेत तो नहीं हैं। जरूरी नहीं कि बच्चों में जीवनभर रहे बीमारी
पीडियाट्रिक रुमेटोलॉजी सोसायटी की चेयरपर्सन डॉ. दीप्ति सूरी ने बताया कि एक लाख में से 14 बच्चों को गठिया रोग हो रहा है। अनुवांशिकता के अलावा गर्भावस्था के दौरान मां को गठिया होने पर जन्म लेने वाले शिशु में भी गठिया के लक्षण मिल रहे हैं। कई बार बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर बार-बार माता-पिता डॉक्टर बदलते हैं, लेकिन आराम नहीं मिलता है। जबकि यह गठिया के कारण भी हो सकता है। गठिया का समय पर पता लगाकर उपचार कराना आवश्यक है। इससे ब्रेन, किडनी और लंग्स को भी नुकसान पहुंच सकता है। जरूरी नहीं है कि सभी बच्चों को यह बीमारी जीवनभर रहे। बीमारी पर नियंत्रण रखने से लाभ मिलता है। हर आयु में हो सकता है गठिया
सेक्रेटरी डॉ. ज्योति संघवी ने बताया कि गठिया रोग नवजात से लेकर किसी भी आयु में हो सकता है। हमारे पास 16 वर्ष तक के बच्चे उपचार के लिए आते हैं। यदि समय पर बीमारी पकड़ में आ जाए तो अच्छी दवाइयां हैं, जिससे मरीजों को लाभ मिल रहा है।
बच्चों में गठिया के कई लक्षण आम वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन से मिलते-जुलते होते हैं, जिसके कारण समय पर पता नहीं चल पाता है। गठिया एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही अपने ही स्वस्थ टिश्यू पर हमला करने लगती है। पहले इस बीमारी को पहचानना मुश्किल होता था, लेकिन अब हमारे पास जांच और इलाज दोनों की अच्छी सुविधा है। इसके कारण भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज


