इंदौर के बड़ा गणपति स्थित मोदी जी की नसिया में मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने धर्म और जीवन के गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन में वास्तविक आनंद का स्रोत है और हर समस्या का समाधान प्रदान करता है। मुनिश्री ने समझाया कि भौतिक सुविधाएं जैसे रोटी और कपड़े महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वास्तविक संतुष्टि केवल धर्म से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास सभी भौतिक सुख-सुविधाएं हों, लेकिन संतुष्टि न हो, तो वह सब व्यर्थ है। उन्होंने मानव मन की प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनुष्य का मन परिवर्तनशील है। जो चीज सुबह सुख का कारण होती है, वही शाम को दुख का कारण बन सकती है। यह दर्शाता है कि सांसारिक सुख-दुख परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। मुनि श्री ने एक महत्वपूर्ण जीवन सूत्र दिया कि सभी को संतुष्ट करना बेहद कठिन है, लेकिन स्वयं को हर परिस्थिति में संतुष्ट रखना सरल है। उनके अनुसार, वास्तविक आनंद सांसारिक सुख-दुख से परे है और यह केवल आत्मिक संतुष्टि से प्राप्त होता है। 1. जो मिला है उसे पसंद कर लो- मनुष्य के जीवन की दुर्बलता यह है कि जो उसके पास है वह उसे पसंद नहीं। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज कहते थे कि जो पाता है, सो भाता नहीं**जो भाता है , सो पाता नहीं, इसीलिए सुख – साता नहीं। संतोष का मूल मंत्र है अपनी स्थिति में प्रसन्न रहना*आप कहते हो यह सब पापी पेट के लिए करना पड़ता है। मुनिश्री ने कहा पेट पाप नहीं करता , पेट वाला पाप करता है । पेट भरने की चिंता अवश्य करो, पेटी भरने की नहीं। पेटी भरने की चिंता करोगे तो कभी सुखी नहीं रहोगे। 2. व्यर्थ की आकांक्षाओं से बचें- व्यर्थ की चाह ना रखें । बिना मतलब की बातों में अपने आप को न उलझाएं। व्यर्थ की आकांक्षा , दुराकांक्षा कहलाती है। 3. लालसा को नियंत्रित करिए- लाभ – हानि में समता रखें । धन का नुकसान कम मन का नुकसान बड़ा होता है । मनुष्य के मन की आसक्ति परेशान करती है। 4. होड़ से – प्रतिस्पर्धा से बचो- आज सब प्रतिस्पर्धा में जी रहे हैं । किसी और को अपना टारगेट मत बनाओ,अपना स्वयं का टारगेट बनाओं।हमें होड़ से मुक्त होकर चलना है। मुनि श्री ने कहा कि यदि आपने अपने जीवन में ये चार बातें आत्मसात कर ली तो आपका जीवन धन्य हो जाएगा। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि 11 जनवरी को प्रातः मुनि संघ मल्हारगंज स्थित रामा शाह जी के मंदिर में पहुंचा। वहां मुनिश्री ने अपने मुखारविंद से मंदिर जी की स्थापना के 183 वर्ष बाद प्रथम बार अतिशय कारी नेमीनाथ भगवान की पहली बार शांति धारा करवाई। शांति धारा करने का सौभाग्य महामंत्री हर्ष जैन एवं अनिल सोनी के परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिसंघ के पावन सानिध्य में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक माह की पूर्णमासी को नेमीनाथ भगवान की शांति धारा होगी और प्रतिदिन अभिषेक का समय भी प्रातः 7 से 8 बजे तक एक घंटा निश्चित किया गया। इस अवसर पर पंच लश्करी गोठ के योगेंद्र काला, कमल काला, पारस पांड्या, मनोज काला, सुरेंद्र मोदी के साथ ही पुष्पा कासलीवाल, जयदीप जैन, अमित सिंघई, भूपेंद्र जैन, सुधीर जैन सहित बहुत अधिक संख्या में समाज जन उपस्थित थे। धर्म सभा का सफल संचालन बाल ब्रह्मचारी अभय भैयाजी ने किया।


