40 करोड़ की लागत से तैयार रालामंडल फ्लायओवर को सोमवार से खोल दिया गया है। डेढ़ साल की देरी और कई हादसों के बाद खुले इस ब्रिज से अब हर दिन 1 लाख से ज्यादा वाहन बिना रुके गुजर सकेंगे। रालामंडल फ्लायओवर शुरू होने से अब तिल्लौर और रालामंडल की तरफ जाने वाले वाहनों को जान जोखिम में डालकर डिवाइडर पार नहीं करना पड़ेगा। इस ब्रिज के शुरू होने से न केवल समय बचेगा बल्कि ईंधन की भी बड़ी बचत होगी। 800 मीटर लंबा यह छह लेन ब्रिज अपनी तय समयसीमा से लगभग दो साल देरी से तैयार हुआ है। फिलहाल अधूरी तैयारियों के बीच इसकी एक ही लेन ट्रैफिक के लिए शुरू की गई है। अभी मांगलिया से तेजाजी नगर की दिशा में जाने वाली लेन ही खोली गई है, जबकि दूसरी लेन पर ट्रैफिक शुरू नहीं किया गया है। पिछले चार दिनों से ब्रिज पर ट्रायल रन चल रहा था, जिसके बाद सोमवार से आंशिक रूप से इसे खोल दिया गया। फिनिशिंग अधूरी है और डिवाइडर की जगह रेत की बोरियां रखी हैं, लेकिन ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने इसे शुरू करने का फैसला लिया है। इस ब्रिज के बनने से क्या-क्या बदलेगा फायदा: रालामंडल, तिल्लौर, तिंछा फॉल और खंडवा रोड की तरफ जाने वाले वाहन चालक अब बिना चक्कर लगाए सीधे निकल सकेंगे। समय की बचत: पहले फ्लायओवर नहीं होने से बायपास पर लंबा जाम लगता था। अब रोजाना करीब 1 लाख वाहन ऊपर से फर्राटा भर सकेंगे। सुरक्षा: पहले ग्रामीण रास्ता न होने के कारण डिवाइडर तोड़कर वाहन निकालते थे, जिससे हादसे होते थे। अब ब्रिज के नीचे से सुरक्षित रास्ता दिया गया है। आगे ये प्रोजेक्ट भी सुधारेंगे इंदौर का ट्रैफिक बायपास पर अर्जुन बड़ौद और एमआर-10 जंक्शन के ब्रिज भी तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इन्हें ट्रैफिक के लिए खोलने में अभी तीन से चार महीने लग सकते हैं। इन प्रोजेक्ट्स के पूरे होने से शहर का ट्रैफिक और सुगम होने की उम्मीद है।


