इंदौर में 15 सालों से कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं जबकि स्टूडेंट्स राजनीति के लिए यह जरूरी है। अगर यदि लोकतांत्रिक तरीके से छात्र संघ के चुनाव नहीं होंगे तो नए नेता कहां से मिलेंगे। इस मुद्दे को लेकर इंदौर में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह जनहित याचिका अवि सूर्यवंशी की ओर से एडवोकेट आकाश शर्मा ने दायर की है। शुक्रवार को इसे लेकर हाई कोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई हुई। याचिका में तर्क दिए गए हैं कि कॉलेजों में एडमिशन लेने के दौरान हर मद में फीस ली जाती है। ऐसे में कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट भी छात्रसंघ चुनाव कराए जाने को लेकर स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है। छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे तो देश-प्रदेश को नया नेतृत्व कैसे मिलेगा। छात्र संघ चुनाव से नेतृत्व का एक आधार बनता है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर पूर्ववत प्रिंसिपल बेंच में पहले से याचिका विचाराधीन है। दरअसल लंबे समय से कॉलेज के छात्रों को सीधे-सीधे वोट देने का अवसर ही नहीं मिला है। क्लास प्रतिनिधि सीधे चुन लिए जाते हैं। वह मिलकर कॉलेज अध्यक्ष तय कर लेते हैं, जबकि छात्रसंघ चुनाव का अपना एक अलग सिस्टम है। प्रदेश के कई ऐसे मंत्री और विधायक हैं जो छात्र नेता या किसी पद पर आासीन होने के बाद छात्र राजनीति में उभरे हैं। उनकी पहचान उस दौरान छात्र नेता के रूप से ही रही है।


