इतिहास के गलत तथ्यों पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, सटीक शोध पर दिया जोर

भास्कर न्यूज | अमृतसर खालसा कॉलेज में श्री गुरु तेग बहादर जी के 350वें वर्षीय शहीदी साका को समर्पित सेमिनार करवाया गया। ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन फल फा व शहादत’ विषय पर समर्पित इस सेमिनार का उद् ाटन कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. आत्म सिंह रंधावा ने किया। विभाग इंचार्ज और डीन आर्ट्स एंड ह्यूम निटीज प्रो. जसप्रीत कौर ने आए हुए मेहमानों व वक्ताओं और स्टूडेंट्स का स्वागत किया। प्रिंसिपल डॉ. रंधावा ने कहा कि गुरु तेग बहादर साहिब जी का जीवन और शहादत पूरी दुनिया के लिए एक बेहतरीन मिसाल है। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने उस समय की सरकार के ज़ुल्म का सामना किया और धर्म की रक्षा के लिए शहादत दी, जिससे डरे हुए लोगों में निडरता आई। इस सेमिनार में विद्वान वक्ताओं ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन, फिलॉसफी और शहादत के अलग-अलग पहलुओं पर कीमती जानकारी सांझी की। इस मौके पर डॉ. मोहब्बत सिंह ने गुरुमुखी स्त्रोत में श्री गुरु तेग बहादर साहिब जी का जीवन टॉपिक पर बोलते हुए गुरुमुखी में लिखे स्त्रोत के बारे में जानकारी सांझी की। बलदीप सिंह रामू वालिया ने शहादत शबद के हिस्टोरिकल बैकग्राउंड और इसके मतलबों के ट्रांसमिशन के बारे में बताया। प्रो. बलवंत सिंह ढिल्लों ने गुरु जी की लिगेसी और विरासत के बारे में बताया। उन्होंने गुलाम हुसैन के लिखे एक फारसी स्त्रोत के आधार पर कुछ पिछली इंग्लिश और दूसरे लेख में गुरु जी के बारे में दर्ज कुछ गलत फैक्ट्स के पीछे की सच्चाई को सामने लाया। उन्होंने स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को सही और असली सोर्स की जांच करने के बारे में कुछ टिप्स भी दिए।

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