इमरजेंसी के मॉनिटर अब भी बंद, ट्रॉली खुद धकेल रहे परिजन, पारासिटामोल तक नहीं

रिम्स को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। पिछले तीन दिनों से लगातार रिम्स की अनियमितता पर सुनवाई कर रहा है। हर दिन निदेशक कोर्ट में सशरीर उपस्थित हो रहे हैं। बावजूद इसके रिम्स की व्यवस्था में सुधार होता नहीं दिख रहा है। प्रबंधन एक ओर बड़ी-बड़ी सुविधाएं शुरू करने का दावा कर रहा है, दूसरी ओर रिम्स की इमरजेंसी में मामूली से मामूली दवा तक नहीं है। दैनिक भास्कर ने रिम्स की पड़ताल की, तीन दिन सुनवाई के बाद व्यवस्था थोड़ी भी बदली है या नहीं… लेकिन स्थिति पहले जैसी ही मिली। शुक्रवार को रिम्स की इमरजेंसी में भर्ती मरीज शंभू राउत (60) के लिए भी निजी दवा दुकान से दवा खरीदकर लाना पड़ा। रिम्स में बुखार के लिए इस्तेमाल में आने वाली दवा पारासिटामोल तक स्टॉक में उपलब्ध नहीं है। शंभू राउत के परिजनों को पारासिटामोल (आईवी) भी निजी दवा दुकान से खरीदनी पड़ी। शंभू की बेटी खुशबू मंडल ने बताया कि देवघर से लेकर बेहतर इलाज के लिए रिम्स आए हैं। लेकिन सुबह करीब 6 बजे आने के बाद दोपहर 2 बजे भर्ती लिया गया। 8-10 मॉनिटर ही चालू हो सके इमरजेंसी में रोगी की स्थिति पर पल-पल की मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। लेकिन करीब एक साल से इमरजेंसी में लगे मॉनिटर बंद हैं। गुरुवार को हाईकोर्ट ने भी सवाल उठाया था। इसके बाद केवल 8-10 बेड के मॉनिटर ही चालू हो सके हैं। इमरजेंसी में मात्र 15 से 20 स्ट्रेचर इमरजेंसी में मरीजों की फ्लो के अनुपात में ट्रॉली की संख्या दोगुनी से अधिक होनी चाहिए। लेकिन केवल 15 से 20 स्ट्रेचर हैं और 10 से 12 ट्रॉली मैन ही हैं। यदि एक मरीज को स्ट्रेचर से इमरजेंसी में ले जाया जाता है तो कम से कम 2 घंटा वह स्ट्रेचर ऑक्यूपाई रहता है। आउटसोर्स के बाद भी वार्ड ब्वाय कम रिम्स अस्पताल की क्षमता करीब 2200 बेड की है। इमरजेंसी में हर दिन 250 के करीब मरीज भर्ती होते हैं। रिम्स में थर्ड व फोर्थ ग्रेड के मैनपावर का जिम्मा निजी एजेंसी को आउटसोर्स पर दिया गया है। बावजूद इसके ट्रॉलीमैन की कमी रिम्स में सालों से है। शुगर मापने का ग्लूकोमीटर भी खरीद कर लाना पड़ा… इमरजेंसी में भर्ती मरीज से केवल दवा ही नहीं, बल्कि ग्लूकोमीटर तक बाहर से मंगाया जा रहा। ताकि परिजन खुद से मरीज की शुगर माप सकें। जबकि यह काम अस्पताल के कर्मियों का है। इमरजेंसी में भर्ती एक रोगी से ग्लूकोमीटर मंगाने के बाद डॉक्टर उनके परिजनों को ग्लूकोमीटर से शुगर मापना भी सिखा रहे थे। दवा कीमत रिफ्रेश टीयर्स ड्रॉप (आई ड्रॉप) 140 लिपवास 400 एमजी टैबलेट 216 पारासिटामोल 100 एमएल आईवी 448 लोपेज इंजेक्शन 18 कुल 822 शंभू राउत के लिए ये दवाएं बाहर से मंगवाई गईं… निजी दवा दुकान से पारासिटामोल आईवी खरीद कर इलाज करा रहे मरीज

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