झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को झिरी में डंप किए गए कचरा के पहाड़ को साफ नहीं किए जाने के मामले की सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम से जवाब मांगा। अदालत ने पूछा कि कचरा का निपटारा करने में इतनी देरी क्यों हुई? कंपनी द्वारा समय पर कचरे का निपटारा नहीं करने पर निगम की ओर से क्या कार्रवाई की गई? अदालत ने निगम को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 22 अगस्त को निर्धारित की है। इससे पहले रांची नगर निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि गुरु रामदास कंस्ट्रक्शन कंपनी को कचरा निपटारा करने का ठेका दिया गया है। दो वर्ष में पूरे कचरे का निपटारा करना है, लेकिन इसकी मशीन कंपनी को समय पर नहीं मिली। इस वर्ष रांची में लगातार बारिश होने के कारण कचरा गीला है, जिससे मशीन में उसकी प्रोसेसिंग में दिक्कत होती है। इन वजहों से देरी हो रही है। वहीं राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कचरा निपटारा के लिए दिए गए काम में सुधार नहीं हुआ तो कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद अदालत ने कंपनी को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। डंपिंग यार्ड दो दिनों में हटाने का निर्देश हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया कि धुर्वा में पारस अस्पताल के पास बनाए गए कूड़ा डंपिंग यार्ड को हर हाल में दो दिनों के अंदर हटाए। साथ ही रांची में पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। अब निगम ने डंपिंग यार्ड हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


