भास्कर न्यूज | अमृतसर जीएनडीएच में सोमवार सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर रहे। डॉक्टरों ने ओपीडी का गेट बंद कर दिया जिस कारण उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई मरीज तो बिना इलाज के लिए ही लौट गए। वहीं जो ज्यादा बीमार थे और उन्हें जल्द उपचार की जरूरत थी, उन्हें रेजिडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड में भेज दिया। उधर, चंडीगढ़ सचिवालय में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन पटियाला के प्रतिनिधियों से सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा के साथ बैठक हुई। जिसमें स्टाइपेंड बढ़ाने पर रजामंदी हो गई और कहा गया कि अगले 10 दिनों में इसकी घोषणा कर दी जाएगी जिस पर जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल स्थगित कर दी है। सुनील कुमार सोमवार सुबह 9 बजे जूनियर डॉक्टरों की ओर से ओपीडी के दरवाजे बंद कर ताले लगा दिए गए। डॉक्टरों की ओर से पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। इस दौरान अपना उपचार कराने के लिए पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते ओपीडी के बाहर मरीजों का जमावड़ा शुरू हो गया। वे ओपीडी में डॉक्टरों को गेट खोलने के लिए मिन्नतें करते हुए दिखाई दिए। एक महिला व्हीलचेयर पर अपना उपचार कराने के लिए पहुंची थी, जिसे उसका बेटा अपने साथ लेकर इधर-उधर घूम रहा था। उसे ओपीडी में इलाज कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि इस दौरान हड़ताल करने वाले कुछ डॉक्टरों की ओर से मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में जाने के लिए कहा जा रहा था।


