ऊषा रानी केस : बेटी को न नौकरी न मुआवजा, फाइल भी दबा रखी

भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम के हेल्थ विभाग में सफाई सेविका ऊषा रानी की फरवरी 2022 में मौत हो गई थी। जिसके बाद करीब 3 साल में ऊषा रानी के बच्चों को आश्रित कोटे की नौकरी से लेकर दूसरा कोई सरकारी लाभ नहीं मिल पाया है। पीड़ितों ने 3 साल तक फाइलें गायब बता दफ्तरों के चक्कर कटवाने का आरोप अमला क्लर्क से लेकर इंचार्ज पर लगाया है। पीड़ित प्रताप (42) और उसकी पत्नी अंजू (38) निवासी हाल बाजार गोल हट्टी फरियाद लेकर निगम दफ्तर पहुंचे। दंपति ने बताया कि ऊषा रानी 2005 में निगम में सफाई सेविका के तौर पर भर्ती हुई थीं। 19 साल तक सेवा देने के बाद उनका निधन हो गया। जिसके बाद निगम से एनओसी भी मिल चुकी है कि उनका कोई ड्यूज बकाया नहीं है। ऊषा रानी की 4 बेटियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी अंजू हैं जो आश्रित नौकरी के लिए 3 साल से निगम दफ्तर के चक्कर काट रही है। उन्होंने बताया कि 3 और बहनें हैं जिन्होंने लाभ लेने के लिए कोई आपत्ति अब तक नहीं जताई है। ^एक कमेटी बनी हुई है जिसे अभी केस पुटअप होगा। इनका कोई फैमिली डिस्प्यूट है। इनकी बेटियां हैं। कमेटी जो निपटारा कराएगी। जो फैसला लेगी मान्य होगा। -डॉ. रमा रानी, एएमएचओ कम एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच इंचार्ज ^ऊषा रानी के केस में फाइल मिल गई है। डॉ. रमा रानी के पास ही है। फाइल दे देंगे। वाट्सऐप कर देंगे। अभी तक एक ही पार्टी आश्रित नौकरी के लिए मिलने आई है। दूसरी पार्टियों की आपत्ति जताने को लेकर कोई शिकायत अभी नहीं आई है मगर पता चला है कि आपत्ति है। अगली मीटिंग में केस कंसीडर कर लेंगे। -सुरिंदर सिंह, एडिशनल कमिश्नर

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