जिले के बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार का सपना इस वित्तीय वर्ष 2024-25 में अधूरा ही नजर आया। उद्योग विभाग के माध्यम से संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत अब तक जिले के एक भी बेरोजगार युवक को ऋण नहीं मिला है। हैरानी की बात यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब केवल दो महीने का समय शेष है। दरअसल, इस वर्ष पीएमईजीपी का लक्ष्य राज्य सरकार द्वारा लगभग 10 महीने की देरी से जिले को दिया गया। देरी के कारण आवेदन प्रक्रिया से लेकर ऋण स्वीकृति तक की पूरी व्यवस्था बाधित है। बेरोजगार युवा रोजगार की आस में जिला उद्योग केंद्र और बैंकों का चक्कर लगाते रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस लाभ नहीं मिल पाया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले को मात्र 35 लोगों को लोन देने का लक्ष्य दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार समय कम रहने के कारण लक्ष्य भी सीमित रखा गया है। अभी जमा आवेदन को स्वीकृति के लिए बैंक को फारवर्ड किया जा रहा है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले को 110 टारगेट मिला था, इसमें से 97 आवेदकों की स्वीकृति मिली थी। उद्योग विभाग के मुताबिक, वित्तीय वर्ष की शुरुआत में कुछ आवेदन ऑनलाइन मिले थे, जिन्हें बैंकों को अग्रसारित भी किया गया था। लेकिन लक्ष्य निर्धारित नहीं होने के कारण बाद में प्रक्रिया बंद कर दी गई। इस दौरान लगभग 135 से अधिक आवेदन जमा हुए, लेकिन लक्ष्य नहीं होने के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में बोकारो डीआईसी के जीएम राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य स्तर से लक्ष्य देर से प्राप्त हुआ है। अब जैसे ही बैंक स्तर पर प्रक्रिया पूरी होगी, पात्र आवेदकों को ऋण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।


