ईडी ने बुलाया नहीं, खुद घोटाले की जानकारी देने गया था संतोष

पुलिस ने अब संतोष को सुरक्षा मुहैया कराई ईडी और रांची पुलिस में विवाद के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि पेयजल स्वच्छता विभाग में हुए 23 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोपी क्लर्क संतोष कुमार घटना वाले दिन 12 ​जनवरी को अपने ही विभाग के कुछ इंजीनियर्स के खिलाफ जानकारी देने ईडी कार्यालय पहुंचा था। उसे ईडी ने कोई समन जारी नहीं किया था। जिन अधिकारियों के बारे में वह जानकारी देने गया था, उनमें कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम और तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार शामिल हैं। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद उसने नवंबर 2025 में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव को भी इस संबंध में लिखित में साक्ष्यों के साथ जानकारी दी थी। इससे पहले जेल में उसने ईडी को कई विभागीय अधिकारियों के बारे में बताया था। 12 जनवरी को उसने ईडी ऑफिस पहुंचकर इन तीन इंजीनियरों के बारे में कागजात के साथ जानकारी देना शुरू किया। जब उससे अन्य अधिकारियों के बारे में जानकारी मांगी तो वह उत्तेजित हो गया। उसने जग को अपने सिर पर मार लिया। खास बात यह है कि जिस संतोष कुमार को घोटाले के आरोप में रांची पुलिस ने गिरफ्तार कर ​जेल भेजा था, उसी को अब पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई है। उसके घर पर तीन दिन से 1-4 का सुरक्षा गार्ड तैनात है। 28 दिसंबर 2023 को हुआ था फर्जी निकासी का केस पेयजल विभाग के खाते से 2 करोड़ 71 लाख 62 हजार 833 रुपए की फर्जी निकासी के मामले में रांची के सदर थाने में 28 दिसंबर 2023 को एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि मार्च 2020 में एलएंडटी कंपनी के फर्जी बिल के आधार पर 2.17 करोड़ रुपए फर्जी खाते में स्थानांतरित किया। सदर थाने की पुलिस ने नौ अप्रैल 2024 को संतोष कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ईडी अनुसंधान में 23 करोड़ रु. का मामला आया सामने ईडी ने जांच में पाया कि करीब 23 करोड़ रुपए की फर्जी निकासी की गई। संतोष कुमार के माध्यम से विभिन्न लोगों को स्थानांतरित 12 करोड़ का हिसाब भी ईडी ने निकाला। संतोष कुमार व उसकी कंपनी ने मेसर्स राकड्रिल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में कुल 22 करोड़ 93 लाख 42 हजार 947 रुपए स्थानांतरित किए थे। चंद्रशेखर व राधेश्याम पर मूल रोकड़ बही नष्ट करने का आरोप संतोष ने विभागीय सचिव को जो जानकारी दी है, उसके अनुसार कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर और तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि ने अप्रैल 2023 से अगस्त 2023 तक और मई 2023 से सितंबर 2023 तक के मूल रोकड़ बही को नष्ट कर जाली रोकड़ बही तैयार करने का आदेश दिया था। उक्त अवधि का रोकड़ बही तैयार कर उन्हें सौंप दिया गया। इसका प्रभार संतोष कुमार ने 21 दिसंबर 2023 को कुमार साकेत को दिया। संतोष कुमार ने यह भी जानकारी दी है कि मूल रोकड़ बही उसके पास सुरक्षित है। उसने बताया है कि विभागीय अभियंताओं द्वारा सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सरकारी दस्तावेजों के साथ मनमाने ढंग से छेड़छाड़ किया जाता रहा है। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात ने एजेंसी के साथ किया अवैध इकरारनामा संतोष के घर पर तैनात एक एसआई और चार जवान। संतोष ने विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाया है। उसने सचिव को दस्तावेज के साथ बताया है कि उन्होंने एजेंसी मेसर्स प्रवीण कुमार जैन के साथ अवैध इकरारनामा किया। इकरारनामा के लिए जमानत की राशि के लिए 5.25 लाख रुपए की गारंटी बैंक अॉफ बड़ौदा दिल्ली की रानी बाग शाखा से 4 जनवरी 2019 को बनवाई। लेकिन प्रभात कुमार ने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए सभी नियमों को ताक पर रखकर एजेंसी प्रवीण कुमार जैन के साथ 2 जनवरी 2019 को ही अवैध इकरारनामा कर लिया। संतोष कुमार ने कहा है कि प्रभात कुमार सिंह ने उसे निलंबित और बर्खास्त करने की भी धमकी देकर उक्त अवैध इकरारनामा पर हस्ताक्षर करवाया।

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