योग साधन आश्रम गोल बाग में रविवार को मासिक सत्संग स्वामी गुरबख्श राय महाराज के सान्निध्य में हुआ। जिसमें पादुका पूजन, हवन यज्ञ, आरती, भक्ति संगीत और स्वामी जी ने प्रवचन हुए। अपने प्रवचनों के दौरान स्वामी महाराज ने कहा कि संत, गुरु, सज्जन पुरुष जहां भी जाएगा वह हर किसी को सुख बांटेगा। वास्तव में यह गुरु ही है जो दूसरे की हिस्से की पीड़ा को सहन कर लेता है। यह गुरु ही है जो शिष्य को परमात्मा से जुड़ने का रास्ता दिखाता है। स्वामी जी ने कहा कि आज ऐसे गुर कम ही मिलते हैं जो हमें योग के मार्ग द्वारा प्रभु प्राप्ति का रास्ता दिखाए। इस संदर्भ में उन्होंने प्रभु रामलाल जी एवं योगेश्वर मुल्क राज जी का वर्णन किया। जिन्होंने प्राचीन योग विद्या को नए आयाम दिए। उन्होंने कहा कि योग का मार्ग अपनाकर प्रभु की प्राप्ति की जा सकती है। वास्तव में अष्टांग योग शरीर से शुरू होता है और परमात्मा तक जाने का एक सरल और सीधा साधन है। यदि हम अपने जीवन में योग को अपना लें। किसी योग गुरु के संपर्क द्वारा धारना, ध्यान, समाधि की शिक्षा तो हम सरलता से परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। दरअसल आज योग को केवल आसनों तक ही सीमित कर दिया गया है। जबकि योग का वास्तविक लक्ष्य मनुष्य को ईश्वर से जोड़ना है। जब हम योग के तीन अंगों का अनुसरण करते हैं तो हम साधना से प्रारंभ करके ध्यान की स्थिति को प्राप्त करते हैं। ध्यान की स्थिति परिपक्व होने के बाद हम समाधि में पहुंच जाते हैं। समाधि एक ऐसी अवस्था है यहां पर मन पूर्णतया ईश्वर से जुड़ जाता है और अपार आनंद की अनुभूति होती है। इसलिए हर व्यक्ति को चाहिए कि वह योग के मार्ग के अनुसरण करें। इस मौके पर सुनील महाजन और राम एंड पार्टी ने अपने भजनों द्वारा सुंदर प्रस्तुति दी। इस मौके पर राजिंदर गाबा, प्रेम गुप्ता, जगदीश नारंग, सुनील महाजन, अश्वनी लोहिया आदि मौजूद रहे।


