पंजाब सरकार ने राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए और शहरी विकास को नई गति देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट विभाग ने ई-नीलामी के जरिए खरीदी प्रॉपर्टीज पर लगने वाले एडीशनल फ्लोर एरिया रेशियो (ए-एफएआर) के शुल्कों को आधा कर दिया गया है। यह फैसला न केवल भविष्य की नीलामियों पर लागू होगा, बल्कि जनवरी 2026 में हुई नीलामियों के खरीदारों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। पंजाब सरकार ने इस संबंधी नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इससे प्रोजेक्ट्स पर डेवलपर्स की लागत कम होगी और इसका फायदा आम ग्राहकों को मिल सकता है। सरकार ने ये कदम उठाते हुए, ई-नीलामी नीति-2025 के पैरा 10.2 में संशोधन किया गया है। पहले एडीशनल एफएआर की कैलकुलेशन के लिए बिड प्राइस का 50% आधार माना जाता था, जिसे अब घटाकर मात्र 25% कर दिया गया है। सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि वह ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के जरिए राज्य की इकोनॉमी को पटरी पर लाने के लिए गंभीर है। नोटिफिकेशन की सबसे खास बात यह है कि इसे पिछली तारीख से भी प्रभावी बनाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने जनवरी 2026 की ई-नीलामी में संपत्तियां खरीदी थीं, वे भी इस रियायती दर का लाभ उठा सकेंगे। विकास गर्ग आईएएस प्रिंसिपल सैक्रेटरी की तरफ से जारी नोटिफिकेशन मोहाली में रियल एस्टेट सेक्टर में नई जान डाल सकता है। शुल्क के फॉर्मूले में बदलाव किया गया है, पर ई-नीलामी नीति-2025 की अन्य सभी शर्तें यथावत रहेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब का यह कदम चंडीगढ़ के आसपास के क्षेत्रों (मोहाली, न्यू चंडीगढ़, जीरकपुर) और लुधियाना जैसे महानगरों में रियल एस्टेट बाजार की तस्वीर बदल सकता है। कर्ज के बोझ से दबे पंजाब के लिए यह नीति राजस्व बढ़ाने और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकती है। जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सरकार चाहती है कि शहरों में ऊंची इमारतों (वर्टिकल ग्रोथ) का निर्माण हो। शुल्क कम होने से बिल्डर्स अब अधिक मंजिलें बनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।


