जिला अभिभाषक संस्थान चित्तौड़गढ़ की ओर से आज गुरुवार को राजस्थान सरकार द्वारा लागू किए गए रेवेन्यू ई-पोर्टल मॉडर्नाइजेशन सिस्टम के विरोध में कड़ा रुख अपनाया गया। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंडल अजमेर के अध्यक्ष के नाम जिला कलेक्टर चित्तौड़गढ़ से मांग की कि इस पोर्टल को वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जाए। अधिवक्ताओं का कहना है कि दिसंबर 2024 में इस ई-रेवेन्यू पोर्टल को लॉन्च करने से पहले न तो प्रदेश के अधिवक्ताओं से कोई राय ली गई और न ही किसी स्तर पर चर्चा की गई, जो पूरी तरह गलत है। 12 जनवरी के आदेश से बढ़ी दिक्कतें अधिवक्ताओं ने बताया कि 12 जनवरी 2025 को राजस्थान राजस्व मंडल द्वारा एक आदेश जारी कर पूरे प्रदेश के अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों—जैसे उपखंड अधिकारी न्यायालय और राजस्व अपीलीय प्राधिकारी न्यायालय—में ई-फाइलिंग सिस्टम को जरूरी कर दिया गया। इस आदेश के बाद राजस्व न्यायालयों में कामकाज को लेकर कई व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे न केवल वकील बल्कि आम पक्षकार भी परेशान हो रहे हैं। बिना संसाधन डिजिटल व्यवस्था बेअसर जिला अभिभाषक संस्थान का कहना है कि किसी भी नई डिजिटल व्यवस्था को लागू करने से पहले उसका पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होना चाहिए। वर्तमान में न तो राजस्व न्यायालयों में पर्याप्त तकनीकी संसाधन हैं और न ही अधिवक्ताओं व आम लोगों को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। ऐसे में ई-फाइलिंग सिस्टम को जबरन लागू करना न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने के बजाय और जटिल बना रहा है। सबसे ज्यादा असर गरीब काश्तकार पर जिला अभिभाषक संस्थान के जिलाध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में आने वाले अधिकतर मामले राजस्थान के काश्तकारों से जुड़े होते हैं। यह वर्ग आर्थिक रूप से कमजोर होता है और न्याय पाने के लिए सबसे ज्यादा निर्भर रहता है। यदि डिजिटल संसाधन जमीन पर उपलब्ध नहीं होंगे तो गरीब काश्तकार के लिए न्याय तक पहुंचना और मुश्किल हो जाएगा। अधिवक्ताओं का मानना है कि बिना तैयारी के लागू किया गया यह सिस्टम फिलहाल आमजन के हित में नहीं है। प्रतिदिन 400 से 500 राजस्व मामले आते हैं जिला अभिभाषक संस्थान के जिलाध्यक्ष नरेश शर्मा ने बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले में प्रतिदिन करीब 400 से 500 राजस्व मामले विभिन्न न्यायालयों में दर्ज होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मामलों को देखते हुए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले पूरी तैयारी और संसाधन होना बेहद जरूरी है, अन्यथा न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। दो दिन का बहिष्कार, कामकाज रहा प्रभावित ई-रेवेन्यू पोर्टल के विरोध में अधिवक्ताओं ने दो दिनों तक राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार किया, जिससे राजस्व मामलों की सुनवाई प्रभावित रही। इस बहिष्कार के माध्यम से अधिवक्ताओं ने सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक विरोध जारी रह सकता है। सरकार से विचार-विमर्श और व्यवस्था सुधार की मांग अंत में जिला अभिभाषक संस्थान की ओर से कलेक्टर से मांग की गई कि राज्य सरकार ई-रेवेन्यू पोर्टल को लागू करने से पहले पूरे राजस्थान में अधिवक्ता समुदाय से विस्तृत विचार-विमर्श करे, आवश्यक तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करे और आम काश्तकार की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही कोई अंतिम निर्णय ले, ताकि न्याय व्यवस्था वास्तव में सरल और सुलभ बन सके।


