उदयपुर में पेराफेरी क्षेत्र में पट्टों की मांग पर पेराफेरी पंचायत जिला संघर्ष समिति के आंदोलन का असर दिख रहा है। पेराफेरी पंचायतों और निगम में शामिल हुए गांवों में आबादी वाली भूमि हस्तांतरण की पहली सूची जारी करने को लेकर यूडीए ने लगभग तैयारी कर ली है। चरणबद्ध तरीके से पेराफेरी गांवो में आबादी आराजी संबंधित पंचायतों और निगम में जो गांव शामिल हुए, वहां निगम को 5 फरवरी तक पहली सूची के तहत जारी करने की तैयारी है। यूडीए कमिश्नर राहुल जैन के साथ गुरुवार को संघर्ष समिति और सर्व समाज के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में कमिश्नर जैन ने बताया- यूडीए की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ आबादी आराजी हस्तांतरण की तैयारी कर चुकी है। नए शामिल गांवों में भी आबादी भूमि पंचायतों को देने के निर्देश संबंधित तहसीलदार एसडीएम को जारी किए जा चुके है। समिति संयोजक चंदन सिंह देवड़ा ने बताया कि बैठक पूरी तरह सकारात्मक रही। प्रशासन अपने किए वादे के हिसाब से ही काम कर रहा है। उम्मीद है कि 205 गांवों के 50 हजार परिवारों को पट्टे की अधूरी आस पूरी हो सकेगी। कई मसलों पर हुई अहम चर्चा
बैठक में संघर्ष समिति ने पुनः दोहराया कि वह खाली जमीन ओर ताजा अतिक्रमण के पक्ष में नहीं है। सालों से बसे लोगों को पट्टे मिलने चाहिए। इसके अलावा चरागाह पर बसे पुराने गांवों को कैसे राहत दे सकते है, गैर खातेदारी में बने मकानो के पट्टे, सामुदायिक विकास के लिए गोशाला, खेल मैदान, पार्क निर्माण, मरघट रिजर्व लैंड पर भी चर्चा की गई। संयोजक देवड़ा ने कहा- तय समय में हर व्यक्ति को उसको मकान का पट्टा दिलाने के लिए समिति कटिबद्ध है और तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यूडीए सचिव हेमेंद्र नागर ने कहा- यूडीए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी, लेकिन सालों से बसे लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा। नियम ने भी शिथिलता के लिए भेजा पत्र इधर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने गुरुवार को 69ए के तहत पट्टे जारी करने को लेकर संघर्ष समिति द्वारा मांगी गई, शिथिलता के क्रम में सरकार को पत्र भेज दिया है। आपको बता दे कि निगम 2018तक, यूडीए 2013 तक ओर पंचायतें 2016 तक पट्टे जारी कर चुके हैं। ऐसे में निगम वर्तमान में 1992के नियम को मान रहा है, जिससे विरोधाभास पैदा हुआ है। सरकार को तय करना है कट ऑफ डेट क्या रखनी है। बैठक के दौरान मोहन लाल डांगी, देवकिशन सुथार,लोकेश पालीवाल, ईश्वरलाल, हेमराज गुर्जर, प्रकाश प्रजापत, मांगीलाल, गजेन्द्र सिंह, धर्मचंद मीना, रवि कुमार, नारायण गमेती, किशन कालबेलिया, किशन मेघवाल समेत संघर्ष समिति के प्रतिनिधि शामिल थे।


