प्रतापगढ़ | प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा की सीमा के बीच सुहागपुरा के निकट फैला छप्पन का मैदान कांठल अंचल की प्राकृतिक समृद्धि का जीवंत प्रतीक है। ऊपरी पठारी क्षेत्र में स्थित यह भू-भाग माही नदी के विस्तृत बेसिन से घिरा हुआ है, जो इसे न केवल भौगोलिक दृष्टि से खास बनाता है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से भी भर देता है। जैसे ही डालनी पहाड़ियों के पीछे से सूरज क्षितिज पर उभरता है, पूरा इलाका सुनहरी रोशनी में नहा जाता है। हल्की धुंध की चादर के बीच सूर्य की किरणें खेतों, पेड़ों और दूर-दूर तक फैली हरियाली को छूते ही दृश्य में एक अलौकिक चमक भर देती हैं। नीचे बहती छोटी-बड़ी नदियां, जलधाराएं, जो माही नदी की सहायक हैं, इस पठारी क्षेत्र को जीवन और हरियाली प्रदान करती दिखाई देती हैं। सुबह के समय यहां का वातावरण अत्यंत शांत, निर्मल और सुकून देने वाला : पक्षियों की मधुर चहचहाहट, ठंडी हवा के झोंके और उगते सूरज का सौम्य प्रकाश मिलकर ऐसा एहसास कराते हैं, मानो प्रकृति स्वयं नए दिन का स्वागत कर रही हो। आसपास फैले खेत, छोटी बस्तियां, ग्रामीण जीवन की सरलता आत्मनिर्भरता और प्रकृति से जुड़े जीवन का संदेश देती हैं। प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा को जोड़ने वाला यह क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी अपार संभावनाएं समेटे हुए है।


