उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए व ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा जरूरी: डॉ कुजूर

भास्कर न्यूज | सिंदरी बीआईटी सिंदरी के असैनिक अभियंत्रण विभाग की ओर से शनिवार को असैनिक अभियंत्रण में जैव उपचार का भविष्य में अवसर व चुनौती विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि आईआईटी आईएसएम धनबाद के प्राध्यापक, डॉ तिनेश पठानिया व एनआईटी पटना के प्राध्यापक डॉ अनिल कुमार शर्मा शामिल हुए। विभागाध्यक्ष डॉ जीतू कुजूर, प्रो डॉ उदय कुमार सिंह, प्रो प्रफुल्ल कुमार शर्मा, डॉ माया राजनारायण रे, प्रो प्रशांत रंजन मालवीय ने मंच साझा किया। अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। डॉ कुजूर ने कहा कि इस प्रकार के नए व ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करने से उच्च शिक्षा व शोध के लिए काफी सहायक साबित होगा। प्रो मालवीय ने विद्यार्थियों को इस नए शोध विषय पर ध्यान देने की अपील की। डॉ माया राजनारायण रे ने अपने विचार व्यक्त किए। तकनीकी सत्र के अंतर्गत प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। पहले सत्र में डॉ पठानिया ने बायोरिमेडिएशन की नवीनतम तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने भूजल शुद्धिकरण से जुड़े अपने अनुसंधान व मॉडलों की जानकारी दी। जैविक प्रदूषकों के बारे में विस्तार से बताया तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। डॉ कोमल कुमारी के धन्यवाद ज्ञापन किया। दूसरी तकनीकी सत्र में डॉ अनिल कुमार शर्मा ने बायोरिमेडिएशन के व्यावहारिक अनुप्रयोगों व माइक्रोबियल-इंड्यूस् ड कैल्साइट प्रीसिपिटेशन पर जानकारी दी। दोनों सत्रों में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के विस्तार से उत्तर दिए। इन विषय को असैनिक अभियंत्रण की ओर से नई ऊंचाई तक ले जाने की बात कहीं। प्रो मालवीय ने निदेशक बीआईटी सिंदरी एवं विभागाध्यक्ष डॉ कुजूर को कार्यक्रम के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। कार्यशाला के आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सहयोग की सराहना की।

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