उत्तराखंड की संस्कृति की झलक दिखी:उत्तरायणी कौथिग में झोड़ा-चांचरी से लेकर लोकगीतों तक, सात दलों ने दी शानदार प्रस्तुति

लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित 10 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग के सातवें दिन उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। महेंद्र पंत के नेतृत्व में उत्तरायणी गीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए सात झोड़ा दलों ने पारंपरिक वेशभूषा में अपनी कला का प्रदर्शन किया। राधा जोशी, मीना पाण्डेय, कुन्ती रावत, रेनू काण्डपाल, नीलम जोशी, हरितिमा पंत और लता बौड़ाई के नेतृत्व में कलाकारों ने उत्तराखंडी गीतों पर झोड़ा चांचरी नृत्य प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में पहाड़ी धुनों पर देसी ठुमका में सविता बिष्ट और दीपा पाण्डेय ने अपनी प्रतिभा दिखाई। झूमिगो-छपेली प्रतियोगिता में गोमती नगर शाखा और इंदिरा नगर-2 की टीमों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम आकर्षण ‘कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला बना कार्यक्रम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चीफ मैनेजर जया अवस्थी मुख्य अतिथि और राज्य भाषा अधिकारी दिनेश मणि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक चंद्रप्रकाश, राकेश खनवाल और नीरज चुफाल ने अपने लोकगीतों से समां बांध दिया। विशेष आकर्षण लोहाघाट से आए भैरव राय के दल ‘कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला दर्पण’ का रहा। चित्रकला प्रतियोगिता 2025 में भवयांशा उप्रेती ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम में के एन पाण्डेय, षंकर पाण्डेय, मंजू पडेलिया, जानकी अधिकारी, बीना रावत, देवेन्द्र मिश्रा सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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