श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को लेकर निकली रथयात्रा आज उदयपुर जिले के खेरवाड़ा कस्बे में पहुंची। यात्रा का वहां पर सर्व हिन्दू समाजजनों ने स्वागत किया। इस दौरान विश्व की सबसे छोटी हस्तलिखित श्रीमद् भागवत गीता का सम्मान किया गया। मेहंदीपुर बालाजी मंदिर महंत नरेशपुरी महाराज के सानिध्य व आचार्य राजेश्वर के नेतृत्व में गुजरात के द्वारका से रवाना हुई रथयात्रा खेरवाड़ा कस्बे में पहुंची। डाक बंगला परिसर में विप्र फाउंडेशन के बैनर तले सर्व हिन्दू समाजजनो ने रथ यात्रा का स्वागत किया। आचार्य ने यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने व भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर निर्माण को लेकर इस यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। रथयात्रा 4 मार्च को गुजरात के द्वारका से निकली थी। यात्रा यहां से ऋषभदेव, उदयपुर, नाथद्वारा होकर 23 मार्च को मथुरा पहुंचेगी। भक्त कवि डॉ कैलाश परवाल द्वारा रचित श्री कृष्णम महाकाव्य पुस्तक वितरित की गई। गीता की लंबाई 5 इंच और चौड़ाई 3.5 इंच डाक बंगले पर हुए कार्यक्रम में विश्व की सबसे छोटी हस्तलिखित श्रीमद् भागवत गीता का सम्मान किया गया। आर्टिस्ट डॉ राम सिंह राजेरिया ने बताया कि इस दिव्यतम गीता की लंबाई 5 इंच और चौड़ाई 3.5 इंच है। इस पर गीता के संपूर्ण 18 अध्याय व 700 श्लोक संस्कृत भाषा में उकेरे गए है। आर्टिस्ट राजेरिया इस सूक्ष्मतम श्री दिव्यतम गीता को बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, वृंदावन के प्रेमानंद महाराज सहित कई ख्यातनाम विभूतियों से सम्मान प्राप्त कर चुके है। इस दौरान विप्र फाउंडेशन अध्यक्ष हितेश जोशी के नेतृत्व में विप्रजनो ने आचार्य राजेश्वर जी का उपरणा ओढ़कर स्वागत किया। इस दौरान पंडित नंदकिशोर दयालपुरा, शांतिलाल व्यास, हरीश पानेरी, सुरेश चंद्र व्यास, रणछोड़ लाल व्यास, ओम व्यास, मनीष चौबीसा, राजेंद्र पानेरी, शंकर लाल पंचाल, शैलेश उपाध्याय, संजय शर्मा, सुनील राजपुरोहित,मुकेश टांक, नरेंद्र शर्मा आदि मौजूद थे। इनपुट: हितेश जोशी, खेरवाड़ा


