उदयपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ:3 लाख लीटर दूध प्रोसेसिंग का नया प्लांट लगेगा, बजट में घोषणा संभव

उदयपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (सरस) में 3 लाख लीटर दूध प्रोसेस करने वाला नया प्लांट लगेगा। अभी 41 साल पुराने मौजूदा प्लांट की क्षमता 1.10 लाख लीटर की है, जबकि दूध ही रोज 1.50 लाख लीटर आ रहा है। नए प्लांट के लिए डेयरी संघ ने प्रोजेक्ट की रिपोर्ट और खर्च का प्लान बनाकर प्रदेश सरकार को भेज दिया है। इस संबंध में 22 जनवरी को सीएम भजनलाल शर्मा के साथ बैठक भी है। सरकार आगामी बजट घोषणा में नए प्लांट की सौगात दे सकती है। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार से भी बजट मांगा जाएगा। डेयरी संघ के अध्यक्ष डालचंद डांगी ने बताया कि नए प्लांट पर करीब 150 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। मौजूदा प्लांट की 50 बीघा जमीन है। इसमें से 10 बीघा में ऑफिस-प्लांट व सरस पार्लर आदि बने हुए हैं। नए प्लांट के लिए 5 बीघा जमीन की जरूरत होगी। ऐसे में मौजूदा जगह पर ही इसे तैयार किया जाएगा। बता दें कि नवंबर माह की शुरुआत में डेयरी मंत्री जोराराम कुमावात ने प्लांट का दौरा किया था। उस समय नया प्लांट लगाने पर चर्चा हुई थी। ऑटोमेटिक होगा प्लांट, आइसक्रीम-मिठाई आदि की इकाई भी लगेगी नया प्लांट पूरी तरह से ऑटोमेटिक होगा। पुराने प्लांट में छाछ, लस्सी, पनीर, श्रीखंड, मावा आदि प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं। पनीर आदि को काटने का काम हाथों से होता है। नए प्लांट में ऑटोमेटिक तरीके से इस प्रोसेस कर पैक किया जाएगा। इसके साथ ही आईसक्रीम, मिठाई सहित अन्य डेयरी उत्पाद बनाने के लिए इकाई बनेगी। प्लांट की क्षमता बढ़ने से नए दूध व्यवसायी भी जुड़ेंगे। बता दें कि पिछली दीपावली पर भी डेयरी की ओर से शहरभर में काउंटर लगाए गए थे। इन पर विभिन्न तरह की मिठाइयों सहित कई अन्य उत्पादों की बिक्री की गई थी। दूध उत्पादन बढ़ने के बावजूद 20 साल परेशानी नहीं आएगी वर्ष 1983 में बने मौजूदा सरस प्लांट की क्षमता रोजाना 1.10 लाख लीटर की है। अभी रोज 40 हजार लीटर की अतिरिक्त दूध की आवक होती है। इसमें बांसवाड़ा से रोज आने वाला 25 हजार लीटर दूध भी शामिल है। वहां प्लांट नहीं होने के कारण दूध को उदयपुर भेजा जाता है। क्षमता कम होने और दूध की आवक ज्यादा होने के कारण प्लांट को साल में 365 दिन चालू रखना पड़ता है। नया प्लांट बनने के बाद 20 साल तक दूध उत्पादन बढ़ने पर भी कोई समस्या नहीं होगी। डेयरी संघ की उदयपुर जिले में 560 समितियां हैं। इनसे 12 हजार 500 लोग जुड़े हुए हैं। जिले में 170 बल्क कूलर लगे हुए हैं। जहां से दूध संग्रहित करके डेयरी संघ में भेजा जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *