फतहसागर झील में मुंबइया बाजार के सामने बाेटिंग पाॅइंट पर भी साेलर/इलेक्ट्रिक बाेट शुरू करने की कवायद शुरू हाे गई है। यूडीए ने यहां इलेक्ट्रिक बोट चलाने के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। ये 28 जनवरी तक जमा कराए जा सकेंगे। टेंडर के अनुसार फर्म काे 7 बोट चलाने की अनुमति दी जाएगी। इनमें से 3 स्पीड बाेट हाेंगी। ये 5 से 6 सीटर हाेंगी। चार बोट सामान्य होंगी और 20 से 30 सीटर हाेंगी। इसके अलावा रेस्क्यू के लिए एक पेट्राेल बोट के संचालन की अनुमति रहेगी। टेंडर की शर्त के अनुसार टिकट की दर से 150 से 600 रुपए प्रति व्यक्ति रहेगी। इसकी दरों में हर साल 10% तक वृद्धि की जा सकेगी। टेंडर 3 साल के लिए होगा। इसमें एक साल की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जा सकेगी। इसके बदले में 4.85 करोड़ का राजस्व सालाना मिलेगा। फायदा…झील में प्रदूषण का स्तर घटेगा, जलीय जीव भी सुकून से रहेंगे 1 जनवरी से संचालन बंद…अभी इस झील से बोट संचालन के दो पाॅइंट हैं। इस पॉइंट पर अभी तक श्रीरामदेव जनरल मोटर्स की 7 नावों का ठेका था। ये पेट्रोल संचालित थीं। इसका ठेका पूरा होने के बाद 1 जनवरी से संचालन बंद था। दूसरा पॉइंट मोती मगरी के सामने हैं। जहां हाल ही उज्जैन ड्रीम्स को 3 साल के लिए ठेका दिया गया है। उसकी यहां से 7 इलेक्ट्रिक/सोलर बोट संचालित हैं। फतहसागर में सभी बोट इलेक्ट्रिक होने से झील 9 जीवों का संरक्षण होगा। यूडीए फतहसागर झील काे साफ रखने के लिए इकाे फ्रेंडली नावाें का संचालन कराना चाहता है। हाईकाेर्ट ने भी झीलाें में इकाे फ्रेंडली नावों के संचालन का आदेश दे रखा है। माेती मगरी के सामने पहले से इलेक्ट्रिक/सोलर बाेट चल रही हैं। अब मुंबइया बाजार के सामने से भी ऐसी ही नावों का संचालन शुरू होने से झील में प्रदूषण का स्तर घटेगा। इसके साथ यह जलीय जीवाें की सेहत और सुरक्षा के लिए अच्छा रहेगा। इससे पहले सीएनजी से भी बाेट संचालन की काेशिश की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणाें से यह मामला अटक गया। मार्च से सितंबर तक सुबह 8 बजे से शाम 7:30 बजे तक संचालन
टेंडर के अनुसार 1 मार्च से 30 सितंबर तक सुबह 8 बजे से शाम 7:30 बजे तक बाेट संचालन की अनुमति मिलेगी। इसी तरह एक अक्टूबर से फरवरी माह के अंतिम दिन तक सुबह 8:30 बजे से शाम 6 बजे तक बाेट संचालन किया जा सकेगा। पुरानी फर्म और यूडीए में चल रहा विवाद
फतहसागर झील में श्रीरामदेव जनरल माेटर्स का ठेका खत्म होने और नावों का संचालन रोके जाने के बाद से यूडीए व ठेका फर्म आमने-सामने है। यूडीए ने इस फर्म काे 3.50 कराेड़ बकाया चुकाने का नोटिस भी दिया है। दूसरी ओर, फर्म का कहना है कि पहले तकनीकी कारणों से उसकी नावें लंबे समय बंद रखी गई। इससे उसे घाटा हुआ। इसके अलावा वे सभी बकाया दे चुके हैं। नाव संचालन की अवधि बढ़ानी चाहिए।


