उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने संसद के शून्यकाल में बुधवार को सेन्ट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी खोलने की मांग की। सांसद ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान के इस क्षेत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी खुलने से राजस्थान, गुजरात और एमपी की 3 करोड़ की जनजाति आबादी को सीधा फायदा मिलेगा। सांसद रावत ने संसद में आदिवासियों के लिए अलग से धर्म कोड की मांग को गलत बताते हुए आपत्ति जताई। सांसद रावत ने बताया कि केन्द्र सरकार जन धन योजना और धरती आभा योजना के तहत जनजाति वर्ग के विकास की पूरी कोशिश कर रही है। नार्थ ईस्ट और तेलंगाना में एक-एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। जबकि राजस्थान, गुजरात और एमपी में बड़ी जनजाति आबादी होने के बावजूद सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी नहीं है। उन्होंने 275 (1) के तहत स्थापना का हवाला देकर केन्द्र जनजाति कार्य मंत्रालय से उदयपुर संभाग में सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी खोलने की मांग की। शून्यकाल में सांसद रावत ने कहा कि भील जनजाति देश में सबसे बडी अनुसूचित जनजाति में से एक है। मानगढ़ धाम का बलिदान हो या हल्दीघाटी का युद्व हो, भील जनजाति ने हमेशा से आदिदेव महादेव को साथ लेकर आंदोलन किया है और आक्रांताओं का मुकाबला किया है। भील जनजाति राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में सर्वाधिक निवास करती है, जिसकी जनसंख्या लगभग तीन करोड़ से ज्यादा है। यही नहीं इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के सांसद द्वारा आदिवासियों के लिए अलग से धर्म कोड़ लागू करने की मांग पर आपत्ति दर्ज कराई। रावत ने कहा कि देश में जनजाति समाज हिंदू समाज है। अलग से धर्म कोड की मांग गलत है। इस पर उनकी आपत्ति हैं।


