शहर में 36 आत्मानंद स्कूल उधार में चल रहे हैं। क्योंकि इन स्कूलों को चलाने के लिए फंड नहीं है। सत्र खत्म होने वाला है, लेकिन स्कूल चलाने के लिए शासन की ओर से दी जाने वाली 5 लाख की आकस्मिक व्यय निधि अब तक नहीं मिली है। स्कूल प्रबंधन के पास चॉक, डस्टर, रजिस्ट्रर, फिनाइल समेत अन्य सामग्री खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। स्थिति ये हो गई है कि तिमाही, अर्धवार्षिक परीक्षा करवाने के साथ-साथ मार्कशीट देने के लिए भी स्कूल वाले बच्चों से पैसे ले रहे हैं। जानकारी के अनुसार सत्र शुरू होने के 6 माह बाद स्कूलों को दिसंबर में 79-79 हजार रुपए दिए गए थे। जनवरी में भी 1-1 लाख रुपए मिले। पहले हर स्कूल को हर साल 5-5 लाख मिलता था। प्राचार्यों के अनुसार यहां स्टेशनरी, सफाई, मरम्मत, परीक्षा, टेस्ट व अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए फंड की ज़रूरत होती है। गंगा नगर के आत्मानंद स्कूल में तो आज भी कुछ क्लास में बेंच नहीं हैं। बच्चे जमीन पर बैठ रहे हैं। स्कूल के पंखे खराब
तिलक नगर स्थित आत्मानंद स्कूल के बच्चों ने बताया कि कई पंखे खराब हैं। टीचर्स के स्टाफ रूम में भी पंखे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में पंखे आए हैं, लेकिन इलेक्ट्रिशियन नहीं लगा रहा है। प्रिंसिपल ने बताया कि उसका पैसा बकाया है। इसलिए काम नहीं कर रहा है। जमीन पर बैठ रहे बच्चे
गंगानगर आत्मानंद स्कूल के कुछ क्लास में आज भी बेंच नहीं हैं। बच्चे जमीन पर बैठ रहे हैं। बच्चों के परिजनों ने बताया कि दिसंबर में स्कूल प्रबंधन के पास मार्कशीट के लिए भी पैसे नहीं हैं। बच्चों से 50-50 रुपए क्लास टीचर के पास जमा कराए गए। फिर बाजार से खरीदकर मार्कशीट दिया। परीक्षा के लिए पैसे लिए
गुढ़ियारी आत्मानंद स्कूल के बच्चों ने बताया कि यहां अर्धवार्षिक परीक्षा आयोजित करने के लिए सभी से 100-100 रुपए मांगे गए थे। कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों ने पैसे दे दिए, बाकी कक्षाओं के भी 10-15 बच्चों ने पैसे दिए। बच्चों से अन्य कार्यों के लिए भी पैसे ले रहे हैं। जिम्मेदार नहीं दे रहे जवाब
इस संबंध में जब लोक शिक्षण संचालनालय की डायरेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि सहायक संचालक योगेश शिवहरे बताएंगे। लेकिन जब शिवहरे से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं इस संबंध में बोलने के लिए अधिकृत नहीं हूं।


