शहर के सबसे बड़े करीब 600 साल पुराने बूढ़ातालाब पर पिछले दो दशक में 50 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। रायपुर स्मार्ट सिटी ने भी 35.07 करोड़ की योजना बनाई थी। इसमें से करीब 34 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इससे पहले 15 से 17 करोड़ के काम अलग-अलग समय पर हुए हैं। ये खर्च सिर्फ बाहरी सौंदर्यीकरण पर किए गए। लेकिन जिस पानी की वजह से तालाब का अस्तित्व है, उसके लिए कोई काम नहीं हुआ। तालाब का पानी गहरे हरे रंग का और प्रदूषित हो गया है। पानी से उठने वाली दुर्गंध सरकारी एजेंसियों के करोड़ों खर्च कर किए गए सौंदर्यीकरण की हंसी उड़ा रही है। इस तरह से फूंका गया फंड


