छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम भाजपा की सुनामी की हकीकत बयां कर रही है। नगर निगम के महापौर, पालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्षों में एकतरफा जीत हासिल करने के साथ ही कांग्रेस के कई ऐसे किले भी ढह गए जो भाजपा के लिए अभेद्य थे। इनमें कांकेर नगर पालिका में कांग्रेस का 50 साल से कब्जा था लेकिन इस बार वह भाजपा के कब्जे में आ गई। इसी तरह रायपुर नगर निगम 15 साल से कांग्रेस के पास थी लेकिन इस सुनामी में वह भी धराशायी हो गई।
साल 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद तरुण चटर्जी रायपुर के पहले महापौर थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया था। राज्य बनने के बाद पहला निकाय चुनाव 2004 में हुआ। तब भाजपा के सुनील सोनी रायपुर निगम के महापौर बने। इसके बाद 2010 से 2025 तक यानी 15 साल तक कांग्रेस के मेयर ही सत्ता पर काबिज रहे। इनमें किरणमयी नायक, प्रमोद दुबे और एजाज ढेबर शामिल हैं। महासमुंद: 25 साल बाद भाजपा के पूर्व विधायक विमल चोपड़ा हारे
महासमुंद नगर पालिका में भाजपा के पूर्व विधायक विमल चोपड़ा को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस के निखिलकांत साहू ने चुनावी मैदान में विमल चोपड़ा को पटखनी दी है। दरअसल साल 2000 में डॉ विमल चोपड़ा ने निखिल कांत साहू के पिता मनोज कांत साहू को एक हजार वोटों से शिकस्त देकर पहली बार चुनाव जीता था। उन्हीं के बेटे निखिल कांत ने विमल चोपड़ा को करीब 3500 वोटों से हराकर अपने पिता की हार का बदला ले लिया। कांकेर नपा में खिला कमल
कांकेर नगर पालिका में भाजपा ने कांग्रेस का किला भेद दिया है। यहां पर भाजपा के अरुण कौशिक ने कांग्रेस के जितेंद्र सिंह ठाकुर को 3807 से वोटों से हरा दिया है। कांकेर में 50 साल से कांग्रेस का कब्जा था। लेकिन इस बार शहर की जनता ने भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया है। राज्य बनने के बाद पहली बार आरंग में भाजपा
आरंग नगर पालिका में राज्य बनने के बाद पहली बार भाजपा का अध्यक्ष बना है। यहां संदीप जैन ने कांग्रेस के मंगलमूर्ति अग्रवाल को 3,516 मतों के अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। वहीं, नगर पालिका के 17 में से 10 वार्डों में भी भाजपा ने जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने 5 और शिवसेना ने 2 वार्डों पर कब्जा जमाया है।


