राजस्थान को प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री देने वाला मलारना चौड़ कस्बा आज अपने ही अस्तित्व को बचाने में संघर्षरत है। यही नहीं आजादी के बाद तहसील का दर्ज प्राप्त मलारना चौड़ 1952 के आम चुनावों में विधानसभा क्षेत्र रहा और मलारना चौड़ के साथ महुवा से जीतकर टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बने। इसके बावजूद मलारना चौड़ का विकास नहीं हो सका बल्कि विधानसभा और न्याय पंचायत का दर्जा भी छीन गया। ग्रामीण धर्मराज डीलर का कहना की कस्बा हमेशा से राजनीति के हाशिए पर रहा और हर जगह इसकी उपेक्षा रही अन्यथा कस्बे में किसी चीज की मांग के लिए संघर्ष नहीं पड़ता। 28 गांवों के लगभग 43600 लोगों को होगा प्रत्यक्ष फायदा मलारना चौड़ कस्बे को तहसील बनाने की मांग 20 सालों से चली आ रही हैं। अगर कस्बे को तहसील में क्रमोन्नत किया जाता हैं तो 28 गांवों के 43600 लोगों (2011 की जनगणना अनुसार) सीधा फायदा होगा उनके धन और समय की बचत होगी। कस्बा हाइवे पर स्थित होने के कारण साधनों की आवाजाही भी अच्छी है। वर्तमान उप तहसील में 9 पटवार मंडल के 28 गांव शामिल है वर्तमान में मलारना चौड़ उप तहसील में मलारना चौड़ ए व बी, निमोद, तारनपुर, श्रीपुरा, बड़ागांव कहार, भाड़ौती, खिरनी ए व बी व जोलंदा पटवार मंडल शामिल है। मलारना चौड़ उप तहसील को तहसील में क्रमोन्नत करवाने को लेकर बाईपास तिराहे पर कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीना को भाजपा कार्यकर्ताओं एवं व्यापार मंडल मलारना चौड़ द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। ग्रामीणों की मांग है कि इस बजट में उपतहसील मलारना चौड़ को तहसील में क्रमोन्नत करवाया जाए। इससे आसपास के तीन दर्जन गांवों को 20 किलोमीटर दूर मलारना डूंगर के चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इससे उनके धन और समय की बचत होने के साथ ही उन्हें निकट ही सारी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। गौरतलब हैं कि आजादी के बाद कस्बा मलारना चौड़ तहसील हुआ करता था। ढाकड़ी के रास्ते के लिए भी ग्रामीणों ने मांग उठाई जिस पर कैबिनेट मंत्री ने आश्वासन दिया कि जल्दी इस कार्य को पूरा करवाएंगे। इस दौरान भाजपा मंडल महामंत्री बनवारी झेराला, धर्मराज डीलर, उमाशंकर तिवारी, रामराज खाती, विजयराम झेराला,ओमप्रकाश नामा,सुनील पुर्विया, संजय सोनी, कांजी मीना, घनश्याम मीना, भीम सिंह मीना, विजयलाल मीना, सहित कई भाजपा कार्यकर्ता एवं आमजन उपस्थित रहे।


