कथा के दौरान उपाध्याय ने कहा कि श्रीराम ने हमें सिखाया कि जीवन में कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, सत्य और कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। भक्ति वह मार्ग है जो मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और प्रेरणा का स्रोत भी बना। मंदिर कमेटी ने समस्त भक्तों से जागरण में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह एक ऐसा अवसर है जहां भक्ति, संगीत और मां भगवती की कृपा का संगम देखने को मिलेगा। भास्कर न्यूज |लुधियाना श्री दुर्गा माता मंदिर, दुगरी फेज-1 में एक सप्ताह तक चली श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भव्य समापन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। वृंदावन से पधारे शिव प्रसाद उपाध्याय जी महाराज ने 7 दिन तक प्रभु श्रीकृष्ण की लीला, श्रीराम के उपदेश और धर्म के मूल सिद्धांतों का रसपान कराया। कथा प्रतिदिन शाम 6 से रात 8 बजे तक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और दिव्य कथामृत का लाभ लिया। प्रभु श्रीकृष्ण की लीला और श्रीराम के उपदेश दोनों ही दिव्य हैं और भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। प्रभु श्रीकृष्ण की लीला न केवल अनंत रूपों में बसी हुई है, बल्कि हर रूप में हमें जीवन के गहरे संदेश मिलते हैं। उनकी माखन चोरी, गोवर्धन पर्वत उठाना, और रासलीला जैसी घटनाएं भगवान के अद्भुत कृत्यों का प्रतीक हैं। कृष्ण ने मथुरा में कंस का वध किया, जो सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है। उनकी मुरली की धुन आज भी भक्तों के दिलों में बसी हुई है, जो भक्ति और प्रेम का संदेश देती है। कृष्ण की लीला का सबसे गहरा उदाहरण गीता में मिलता है, जब उन्होंने अर्जुन को कर्म, भक्ति, और ज्ञान का मार्ग दिखाया। कृष्ण ने गीता में अर्जुन को कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग के सिद्धांत समझाए, जिनसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उनकी मुरली और रासलीला प्रेम और भक्ति के सर्वोत्तम उदाहरण हैं। वहीं, श्रीराम के उपदेशों में आदर्श जीवन की दिशा दी गई है। राम ने रघुकुल की मर्यादा का पालन किया और अपनी हर क्रिया से धर्म और सत्य का पालन किया। श्रीराम के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण घटना थी उनका रामराज्य– जहां हर व्यक्ति सुखी था और राज्य में कोई भी निंदनीय कार्य नहीं होता था। दोनों ही भगवान हमारे जीवन में आस्था और धर्म का संचार करते हैं। मंदिर कमेटी के सदस्यों ने कथा समापन अवसर पर शिव प्रसाद उपाध्याय को सम्मानित किया और उनके द्वारा एक सप्ताह तक श्रद्धालुओं को प्रभु से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। इस दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर हरे राम, हरे कृष्ण के भजनों में लीन दिखे।


