उपार्जन केंद्रों पर खुले में रखा 4 लाख क्विंटल धान:मिलर-ट्रांसपोर्टरों की लापरवाही से मऊगंज में किसानों का भुगतान अटका

मऊगंज जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी व्यवस्था गंभीर संकट में है। उपार्जन केंद्रों से समय पर उठाव न होने के कारण लगभग चार लाख क्विंटल से अधिक धान खुले आसमान के नीचे पड़ी है। मिलर-ट्रांसपोर्टरों की लापरवाही और प्रशासनिक सख्ती की कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिससे उनके भुगतान में हफ्तों की देरी हो रही है। जिले के बहुती, शिवराजपुर, बन्नई, खर्रा चिल्ल मऊगंज और हनुमना सहित कई उपार्जन केंद्रों पर खरीदी गई धान का समय पर उठाव नहीं हो पा रहा है। अनुबंधित मिलर और ट्रांसपोर्टर पर्याप्त वाहनों की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण केंद्रों पर धान का अंबार लग गया है। कई केंद्रों पर बोरों के ढेर इतने अधिक हो गए हैं कि वहां आवाजाही के लिए जगह नहीं बची है। खुले में पड़ी धान के खराब होने का खतरा खुले में पड़ी धान के खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। मौसम में बदलाव या बारिश की स्थिति में इतनी बड़ी मात्रा में रखी धान को बचाना मुश्किल होगा। इसके बावजूद, जिम्मेदार मिलर और ट्रांसपोर्टर स्थिति से अवगत होने के बावजूद उदासीन बने हुए हैं। उठाव में देरी का सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खरीदी के दौरान उन्हें एक हफ्ते में भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन तीन हफ्ते से अधिक समय बीतने के बाद भी कई किसानों के खातों में राशि नहीं पहुंची है। इससे किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं, सहकारी समितियां भी बारदाने की कमी और भंडारण की समस्या से जूझ रही हैं। अध्यक्ष बोले- धान उठाव में देरी से किसानों की परेशानी बढ़ी भारतीय किसान संघ मऊगंज के अध्यक्ष हरिशंकर पांडेय ने बताया कि उपार्जन केंद्रों में खरीदी गई धान का समय पर उठाव न होने से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मिलर-ट्रांसपोर्टरों पर सख्ती की जाए और तत्काल धान का उठाव सुनिश्चित कराया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इस पूरे मामले पर कलेक्टर मऊगंज ने खरीदी केंद्र प्रभारियों को पूर्व ही निर्देश जारी कर चुके हैं कि किसानों से ली गई धान की तत्काल तौल और सिलाई कराकर व्यवस्थित रूप से गोदामों में भंडारण किया जाए, ताकि स्वीकृति पत्रक जारी हो सके और भुगतान में देरी न हो। साथ ही केंद्रों पर छाया, पानी, अलाव, तौल कांटा, बारदाना और श्रमिकों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं। 51% धान का ही परिवहन,धान उठाव ठप प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम तक जिले में 22,667 किसान पंजीकृत किए गए हैं। धान उपार्जन का लक्ष्य 1.20 लाख मीट्रिक टन तय है, जिसके लिए 34 उपार्जन केंद्रों पर खरीदी जारी है।
अब तक 19,876 किसानों से 6,94,268 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। इसमें से 2,83,611 क्विंटल धान का परिवहन किया गया है, जो कुल खरीदी का 51 प्रतिशत है। वहीं भी लगभग चार लाख क्विंटल धान का उठाव अभी शेष है। यदि जल्द ही परिवहन की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो धान खराब होने के साथ-साथ किसानों का नुकसान और भी बढ़ना तय माना जा रहा है।
जिला खाद्य प्रभारी अधिकारी अनिल गुप्ता ने बताया कि खरीदी का कार्य लगातार जारी है, लेकिन उठाव में अपेक्षित गति नहीं आ पाई है। लगभग चार लाख क्विंटल धान उपार्जन केंद्रों पर पड़ी है, जिसे शीघ्र उठवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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