जयपुर में दो दिवसीय ‘ह्यूमन्स एट द कटिंग एज ऑफ रोबोटिक सर्जरी’ कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। वट्टीकुटी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दुनियाभर के 200 से अधिक रोबोटिक सर्जन, टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने भाग लिया। कॉन्फ्रेंस में ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, फ्रांस, भारत, इटली, जापान, स्पेन, यूके और यूएसए के शीर्ष सर्जनों ने एआई-ड्रिवन सर्जिकल एडवांसमेंट्स, डिजिटल पेशेंट एक्सपीरियंस और रोबोटिक्स की भूमिका पर विचार साझा किए। रोबोटिक सर्जरी और एआई का योगदान रॉयल मेलबर्न हॉस्पिटल, ऑस्ट्रेलिया के डॉ. एंथनी कॉस्टेलो के नेतृत्व में टेक्नोलॉजी सेशन आयोजित किया गया, जिसमें एआई, डिजिटल सर्जरी और फ्यूचर सर्जिकल ट्रेनिंग पर चर्चा हुई। इसमें प्रमुख विषय एआई की मदद से सर्जरी के रिजल्ट का अनुमान, 3डी-ऑगमेंटेड रियलिटी का उपयोग, बायोडिजिटल ट्विन्स और डेटा साइंस का सर्जरी में प्रभाव रहे। इस दौरान सेडार्स-सिनाई मेडिकल सेंटर, पोलितेक्निको दी मिलानो और क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के एक्सपर्ट्स ने एआई-ड्रिवन सर्जिकल प्रिसीजन और हेल्थकेयर में इसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए। डेटा साइंस के जरिए सर्जरी में क्रांति” विषय पर चर्चा में एआई-ड्रिवन इनसाइट्स और नेक्स्ट-जेनरेशन क्लिनिकल मॉडल्स की भूमिका को समझाया गया। इस सेशन को सैन लुइगी गोंजागा हॉस्पिटल, इटली के डॉ. फ्रांसेस्को पोर्पिग्लिया और सेडार्स-सिनाई मेडिकल सेंटर के डॉ. एंड्रयू हंग ने मॉडरेट किया। वट्टीकुटी फाउंडेशन के सीईओ डॉ. महेंद्र भंडारी ने कहा किरोबोटिक सर्जरी सिर्फ एक टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि हेल्थकेयर में एक बड़ा बदलाव है। एआई और डेटा साइंस के साथ मिलकर इसे और सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है। वट्टीकुटी एक्सप्लोरर्स के तहत आठ देशों के 20 मेडिकल स्टूडेंट्स को विशेष अनुभव प्रदान किया गया। “इनोवेटर्स चैलेंज” सेशन में एआई-ड्रिवन तरीकों से मेडिकल एजुकेशन को बेहतर बनाने के इनोवेटिव आइडियाज पर चर्चा हुई।


