राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल सोसायटी के तत्त्वावधान में बुधवार को राज्य स्तरीय एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल विद्यालयों के छठवें सांस्कृतिक, साहित्यिक फेस्ट एवं कला उत्सव का उद्घाटन हुआ। उदयपुर शहर के शोभागपुरा स्थित महाप्रज्ञ विहार परिसर में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, ईएमआरएस शिक्षण-प्रशिक्षण से जुड़े लोग एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने विद्यार्थियों से कहा कि वे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ें और नवाचारों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ समाज है। यह धरती हमारी मां है और इसकी रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। डॉ. रावत ने कहा कि एकलव्य आवासीय विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चे आगे चलकर देश और समाज का नाम रोशन करें और अपनी प्रतिभा के बल पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें। समारोह में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुंजीलाल मीना ने कहा कि इस आयोजन से बच्चों में प्रतियोगी भावना का विकास होगा। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों का चयन कर उन्हें आंध्रप्रदेश में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भेजा जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें और समाज व देश का नाम ऊंचा करें। विद्यार्थी जीवन में अपनाएं अनुशासन और संयम
समारोह में साध्वी श्रीजी कल्पयशा ने बच्चों को नशामुक्ति की प्रेरणा देते हुए कहा कि यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो नशे से पूरी तरह दूर रहना आवश्यक है। नशा न केवल व्यक्ति, बल्कि उसके परिवार और आसपास के लोगों का भी नुकसान करता है। इसलिए विद्यार्थी जीवन में अनुशासन और संयम को अपनाकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। 31 प्रकार की प्रतियोगिताएं होगी
आयोजन के प्रभारी अधिकारी एवं निदेशक (सांख्यिकी) टीआरआई सुधीर दवे ने बताया कि इस आयोजन में प्रदेशभर के 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल विद्यालयों से 1100 से अधिक छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय इस महोत्सव के दौरान एकल-सामूहिक नृत्य, वाद-विवाद प्रतियोगिता, रंगोली, चित्रकला, लोकगीत, निबंध लेखन एवं अन्य सांस्कृतिक-साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ी 31 विविध स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। उद्घाटन समारोह में टीएडी आयुक्त कन्हैयालाल स्वामी, टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारी, विद्यालयों के प्राचार्यगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


