एक्सपर्ट बोले- जापान में वर्कफोर्स की कमी:जापान की कंपनियों तक पहुंचेगा जेईसीआरसी का स्टूडेंट नेटवर्क, ग्लोबल चैलेंजेस के लिए तैयार किया जा रहा

ग्लोबल इकोनॉमी में ‘क्रॉस-बॉर्डर सिनर्जीज’ की बढ़ती डिमांड को पहचानते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी ने ग्लोबल एजुकेशन के क्षेत्र में एक मेजर माइलस्टोन हासिल किया है। यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर फॉरेन लैंग्वेज’ ने जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जेट्रो) के साथ मिलकर एक एक्सक्लूसिव कोलेबोरेशन किया है। इसका मकसद इंडियन स्टूडेंट्स को जापान के ‘हाई-टेक’ और ‘डिसिप्लैंड’ कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लिए तैयार करना है। जेईसीआरसी की ओर से आयोजित इस इवेंट का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एकेडमिक एक्सचेंज तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत की युवा ऊर्जा और जापान की ‘प्रेसिजन-ड्रिवन’ इंडस्ट्री के बीच एक ब्रिज बनाने की पहल है । इवेंट के नरेटिव को सेट करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि कैसे जेईसीआरसी की 25 वर्षों की लेगेसी ऑफ इनोवेशन और जैपनीज़ कल्चर की हम्बलनेस जब एक साथ मिलते हैं, तो ग्लोबल करियर के मायने बदल जाते हैं। इवेंट की शुरुआत एक विजनरी नोट पर हुई, जहां यूनिवर्सिटी के मनीष जैन (डायरेक्टर कोलबोरेशंस) और पी शिवानी सिंग (हेड आईपीआर सेल) ने इस पार्टनरशिप को ‘विजन एंड पर्पस’ का संगम बताया। उन्होंने हाईलाइट किया कि जेईसीआरसी का फोकस अब क्लासरूम टीचिंग से आगे बढ़कर इंडस्ट्री पार्टनरशिप्स और इंटरनेशनल एक्सपोजर पर शिफ्ट हो चुका है, ताकि स्टूडेंट्स को ग्लोबल चैलेंजेस के लिए तैयार किया जा सके। जेट्रो के सीनियर डायरेक्टर, ताकानौरी हिगुचि ने की-नोट एड्रेस में एक बहुत ही कैंडिड और फ्रेश पर्सपेक्टिव रखते हुए जापान की डेमोग्राफिक रियलिटी पर बात की। उन्होंने बताया- जापान में ‘एजिंग पॉपुलेशन’ की वजह से वर्कफोर्स की क्रिटिकल शॉर्टेज है। इसके लिए उन्हें ऐसे टैलेंटेड लीडर्स चाहिए जो इंडियन मार्केट की समझ रखते हों और वहां की टीम्स को एफिशिएंटली मैनेज कर सकें। उन्होंने यह भी मेंशन किया कि ट्वेंटीज़ की उम्र वाले प्रोफेशनल्स के लिए जापान में ‘वेज ग्रोथ’ काफी प्रोमिसिंग है।

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